बूंदी नगर परिषद में 21 सितंबर को सभापति पद के लिए चुनाव
भाजपा-कांग्रेस समेत 11 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए, निर्दलीय भी मैदान में
नगर परिषद में कुल 60 सीटों पर दलीय गणित के अनुसार भाजपा 23, कांग्रेस 20, आरएलपी 4 और 13 निर्दलीय पार्षद हैं।
बूंदी नगर परिषद के सभापति पद के लिए 21 सितंबर को चुनाव होंगे, जिसमें भाजपा के पुष्पा बल्दुआ और कांग्रेस के कैलाश गहलोत मुख्य उम्मीदवार हैं। नगर परिषद में भाजपा के 23, कांग्रेस के 20, आरएलपी के 4 और 13 निर्दलीय पार्षद हैं, जिनकी भूमिका निर्णायक मानी जा रही है। मतदान सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक होगा और परिणाम उसी दिन घोषित किए जाएंगे।
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बूंदी। बूंदी नगर परिषद के सभापति पद के लिए 21 सितंबर को चुनाव होने जा रहा है। बुधवार को नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दिन भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपने-अपने नामांकन पत्र दाखिल किए।
नगर परिषद में कुल 60 सीटों पर दलीय गणित के अनुसार भाजपा 23, कांग्रेस 20, आरएलपी 4 और 13 निर्दलीय पार्षद हैं।
नगर परिषद सभापति पद के लिए बुधवार को भाजपा की पुष्पा बल्दुआ और कांग्रेस के कैलाश गहलोत ने समर्थकों के साथ नामांकन प्रस्तुत किया। भाजपा पार्षद गोपाल सिंह रावत ने पुष्पा बल्दुआ का प्रस्ताव किया, जबकि कांग्रेस पार्षद भारत बाघमार ने कैलाश गहलोत का समर्थन किया। नामांकन से पहले पुष्पा बल्दुआ को निर्वाचन अधिकारी जयपाल सिंह राठौड़ ने नगर परिषद में पद की शपथ दिलाई।
मसूदा में भाजपा से टीकमचंद माली और कांग्रेस से भूपेंद्र सिंह मेड़तिया, पीसांगन से भाजपा के लोकेश लंबा और कांग्रेस के मनोहर लाल, बिजयनगर से भाजपा की ममता मोदी, कांग्रेस की नीतिका भाटी और निर्दलीय हेमलता मेहता ने भी नामांकन दाखिल किए।
नामांकन के बाद दोनों प्रमुख दलों में हलचल तेज हो गई है। पार्षदों को अपने पक्ष में बनाए रखने और विरोधी दलों में सेंधमारी रोकने के लिए रणनीतिकार सक्रिय हो गए हैं। निर्दलीय और आरएलपी के पार्षदों को साधने की कोशिशें जारी हैं। 21 सितंबर को मतदान के दौरान क्रॉस वोटिंग की संभावना भी बनी हुई है।
मतदान सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक होगा, इसके बाद मतगणना कर परिणाम घोषित किए जाएंगे।
नगर परिषद में किसी भी दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है। भाजपा 23 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि कांग्रेस 20 सीटों के साथ सत्ता की दौड़ में है। 13 निर्दलीय पार्षद और आरएलपी के 4 पार्षद निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
27 साल बाद सभापति की कुर्सी सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित हुई है। भाजपा ने जनरल कार्ड खेला है, जबकि कांग्रेस ने ओबीसी कार्ड पर दांव लगाया है। भाजपा प्रत्याशी पुष्पा बल्दुआ को स्थानीय विधायक शंकरसिंह गुट का समर्थन प्राप्त है।
सियासी गलियारों में चर्चा है कि भाजपा के अंदरूनी गुटों में क्रॉस वोटिंग का खतरा है। कांग्रेस निर्दलीय और आरएलपी को साधने में लगी है।
वार्ड 38 की हॉट सीट से जैन पार्षद पारस जैन चुनाव से पीछे हट गए हैं। कांग्रेस ने दो अन्य कद्दावर नेताओं को मनाने का प्रयास किया, लेकिन वे आगे नहीं आए।
यदि कांग्रेस की रणनीति सफल रही तो 21 सितंबर के परिणाम नगर परिषद के समीकरण बदल सकते हैं और ब्यावर की राजनीति का चेहरा भी बदल जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- नामांकन किस दिन पूरा हुआ?
- नामांकन प्रक्रिया का अंतिम दिन बुधवार था, जब सभी उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किए।
- निर्दलीय और आरएलपी पार्षदों की भूमिका क्या है?
- निर्दलीय और आरएलपी के 17 पार्षद (13 निर्दलीय + 4 आरएलपी) निर्णायक भूमिका निभाएंगे क्योंकि किसी दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है।
- कौन-कौन से वार्ड से नामांकन हुए?
- मसूदा, पीसांगन, बिजयनगर जैसे वार्डों से भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए।
- क्या क्रॉस वोटिंग की संभावना है?
- हां, सियासी गलियारों में क्रॉस वोटिंग की संभावना बनी हुई है, खासकर भाजपा के अंदरूनी गुटों में।
- भाजपा और कांग्रेस की रणनीति कैसी है?
- भाजपा ने जनरल कार्ड खेला है और कांग्रेस ने ओबीसी कार्ड पर दांव लगाया है, साथ ही कांग्रेस निर्दलीय और आरएलपी पार्षदों को साधने में लगी है।
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