विदेश मंत्री जयशंकर ने V4 देशों के समर्थन का स्वागत किया
पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य ने भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य (V4 देशों) के भारत की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के समर्थन का स्वागत किया। V4 समूह के सभी सदस्य इस मांग में भारत के साथ हैं, जो दशकों से परिषद विस्तार और स्थायी सदस्यता की मांग कर रहा है।
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य के समर्थन का स्वागत किया।
भारत कई दशकों से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता और वीटो पावर की दावेदारी कर रहा है। हालांकि चीन के विरोध के कारण यह अब तक संभव नहीं हो पाया है।
भारत का मानना है कि सुरक्षा परिषद में निष्पक्षता नहीं रह गई है और इसे विस्तार की आवश्यकता है। 1945 में स्थापना के बाद परिषद में केवल एक बार 1965 में विस्तार हुआ था, जिसमें स्थायी सदस्यों की संख्या नहीं बढ़ाई गई।
उन्होंने बताया कि चारों देशों में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र भी मौजूद हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि V4 समूह के सभी सदस्य भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए।
भारत ने शांति अभियानों में योगदान देकर और ग्लोबल साउथ की आवाज़ बनकर अपनी स्थायी सदस्यता की योग्यता साबित की है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पांच स्थायी सदस्य और दस अस्थायी सदस्य होते हैं, जो समय-समय पर बदलते रहते हैं। भारत ने पहली बार 1994 में स्थायी सीट की मांग की थी और 2000 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी इस दावे को दोहराया था।
V4 देश रक्षा क्षेत्र में लंबे समय से भारत के सहयोगी रहे हैं।
एस जयशंकर, विदेश मंत्री
पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य भारत की दावेदारी के समर्थन में एकजुट हैं.
जुराज ब्लानार, विदेश मंत्री
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता कब मांगनी शुरू की?
- भारत ने पहली बार 1994 में स्थायी सदस्यता की मांग की थी।
- भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी क्यों प्रतिष्ठित है?
- भारत ने शांति अभियानों में योगदान देकर और ग्लोबल साउथ की आवाज़ बनकर स्थायी सदस्यता की योग्यता साबित की है।
- V4 समूह के सदस्य देशों का भारत से क्या संबंध है?
- V4 देश रक्षा क्षेत्र में भारत के लंबे समय से सहयोगी रहे हैं।
- सुरक्षा परिषद के विस्तार में अब तक क्या स्थिति रही है?
- 1965 के विस्तार में स्थायी सदस्यों की संख्या नहीं बढ़ाई गई थी, लेकिन भारत विस्तार की आवश्यकता पर जोर देता है।
- क्या चीन की प्रतिक्रिया भारत के स्थायी सदस्यता दावे पर प्रभावित रही?
- हाँ, चीन के विरोध के कारण भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी अब तक संभव नहीं हो पाई है।
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