गूगल बच्चों के यौन शोषण की रिपोर्ट सीधे भारत को देगा
पहले अमेरिकी संस्था को भेजी जाती थी, अब भारतीय एजेंसियों को त्वरित सूचना
गूगल ने भारत से जुड़े ऑनलाइन बाल यौन शोषण के मामलों की रिपोर्ट सीधे भारतीय एजेंसियों को देने का निर्णय लिया है, जिससे पुलिस को जांच में तेजी मिलेगी। यह कदम भारत सरकार की मांग के अनुरूप है ताकि विदेशी संस्थाओं पर निर्भरता कम हो और बचाने की कार्रवाई तुरंत हो सके।
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गूगल ने भारत से जुड़े ऑनलाइन बाल यौन शोषण मामलों की जानकारी सीधे भारतीय एजेंसियों को देने पर सहमति जताई है। इससे पहले ऐसी रिपोर्टिंग अमेरिका की संस्था नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन को भेजी जाती थी। इस बदलाव से पुलिस को खतरे में फंसे बच्चों तक जल्दी पहुंचने में मदद मिलेगी।
भारत सरकार ने बड़ी टेक कंपनियों से बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री की रिपोर्टिंग तेज करने को कहा था, खासकर उन मामलों में जहां बच्चे को तत्काल खतरा हो सकता है। अधिकारियों का कहना था कि अमेरिका स्थित संस्था के जरिए रिपोर्ट भेजने में देरी होती थी, जिससे पुलिस की कार्रवाई प्रभावित होती थी। यह फैसला मेटा की घोषणा के बाद आया है, जिसने पहले ही भारत को सीधे रिपोर्टिंग का आश्वासन दिया था।
बाल यौन शोषण सामग्री दुनियाभर में चिंता का विषय बनी हुई है। नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन की साइबरटिपलाइन को 2025 में दुनियाभर से 2.13 करोड़ से ज्यादा बच्चों के संभावित यौन शोषण से जुड़ी रिपोर्ट मिलीं। अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य क्षेत्रों के अधिकारियों ने प्लेटफॉर्म्स से सामग्री का पता लगाने और रिपोर्टिंग तेज करने को कहा है। ज्यादातर देशों में यह अमेरिकी संस्था मुख्य सूचना केंद्र बनी हुई है।
भारत की पहल का लक्ष्य सीधे रिपोर्टिंग चैनल बनाना है ताकि भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियां विदेशी मध्यस्थ के इंतजार के बिना कार्रवाई कर सकें। गूगल के प्रवक्ता ने बताया, "कंपनी बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट का पता लगाने, उसे रोकने, हटाने और उसकी रिपोर्ट करने में काफी निवेश करती है।"
भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री बनाना, रखना, देखना, शेयर करना, बेचना या प्रसारित करना अपराध है। पहली बार दोषी पाए जाने पर पांच साल तक की जेल और दस लाख रुपए तक जुर्माना हो सकता है। दोबारा अपराध करने पर सात साल तक की जेल और जुर्माना होता है।
आईटी कानून, 2021 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अवैध कंटेंट हटाने के लिए त्वरित कार्रवाई करनी होती है। बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट की पहचान और रोकथाम के लिए उचित तकनीकी उपाय करने होते हैं।
यदि कोई ऐसा कंटेंट दिखे तो राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं और जरूरत पड़ने पर स्थानीय पुलिस या साइबर सेल को सूचना दें। जांच एजेंसियां आपराधिक जांच शुरू कर सकती हैं और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई कर सकती हैं।
ऐसे कंटेंट को अपलोड करने, खरीदने, बेचने, शेयर करने या जानबूझकर प्रसारित करने वाले व्यक्ति भी भारतीय कानून के तहत आपराधिक कार्रवाई के दायरे में आते हैं।
अमेरिका में बच्चों और किशोरों के लिए फेसबुक और इंस्टाग्राम का उपयोग रात के समय प्रतिबंधित होगा और एप चलाने की डेली लिमिट लागू होगी। यह बदलाव 26 अगस्त को मेटा और 29 राज्यों के बीच हुए 16.7 बिलियन डॉलर के कानूनी समझौते के बाद लागू किए जा रहे हैं। यह फैसला भारत सरकार के दबाव और मेटा के समान कदम के बाद आया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- बाल यौन शोषण सामग्री के लिए क्या कानूनी सजा है?
- पहली बार दोषी पाए जाने पर पांच साल जेल और दस लाख जुर्माना, दोबारा पर सात साल जेल और जुर्माना।
- गूगल बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट के खिलाफ क्या करता है?
- गूगल पहचानने, रोकने, हटाने और रिपोर्टिंग में काफी निवेश करता है।
- आईटी कानून 2021 में बच्चों से जुड़ी सामग्री के लिए क्या नियम हैं?
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अवैध कंटेंट हटाने और तकनीकी उपाय करने जरूरी हैं।
- मेटा ने अमेरिका में क्या बदलाव किए हैं?
- फेसबुक और इंस्टाग्राम का रात के समय उपयोग प्रतिबंधित और डेली लिमिट लागू की गई है।
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