सरकार ने मेटा को सोशल मीडिया कंटेंट की जिम्मेदारी बढ़ाने का संकेत दिया
विश्व ओजोन दिवस पर पर्यावरण संरक्षण और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर चर्चा
सरकार ने मेटा कंपनी द्वारा संचालित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को केवल इंटरनेट मध्यस्थ मानने से इनकार करते हुए उनकी जिम्मेदारी बढ़ाने का संकेत दिया है। बाल यौन शोषण सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए मेटा को अधिक जवाबदेही देनी होगी और उसे कानूनी संरक्षण नहीं मिलेगा, जबकि कंपनी ने भारत सरकार के साइबर अपराध केंद्र से जानकारी साझा करने पर सहमति जताई है।
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रांची। सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और थ्रेड्स जैसी मेटा कंपनी की संचालित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को केवल इंटरनेट मध्यस्थ नहीं मानते हुए उनकी जिम्मेदारी बढ़ाने का संकेत दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश में बाल यौन शोषण सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर रांची में विभिन्न संगोष्ठियों और कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। गोस्सनर कॉलेज के बॉटनी विभाग की ओर से आयोजित संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने ओजोन परत के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। डॉ. डीके सक्सेना ने बताया कि ओजोन परत सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों को रोककर पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करती है। उन्होंने कहा कि यह पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने और कृषि फसलों की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
डॉ. हरनन्दन प्रसाद ने बच्चों को पर्यावरण संरक्षण की जानकारी पुस्तकों के अलावा संवाद और गतिविधियों के माध्यम से देने की आवश्यकता बताई। बच्चों ने भी बताया कि सूर्य की किरणें ऊर्जा का स्रोत हैं, लेकिन उनकी हानिकारक यूवी किरणों से बचाव में ओजोन परत अहम है। प्रो. एमके यादव ने कहा कि ओजोन परत का संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।
इसी दौरान झारखंड की सीनियर प्रोग्राम ऑफिसर सुमन समीर ने ई-कचरे के उचित निपटान पर जोर दिया। प्राचार्य इलानी पूर्ती ने गीले कचरे के प्रबंधन और उससे खाद बनाने की प्रक्रिया पर जानकारी दी, जिससे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में मदद मिलती है।
सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों की जिम्मेदारी बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मेटा कंपनी को अब अपने प्लेटफॉर्म पर उपयोगकर्ताओं द्वारा साझा और वितरित कंटेंट के लिए अधिक जवाबदेही लेनी होगी। कंपनी के एल्गोरिदम कंटेंट के प्रचार और वितरण को सक्रिय रूप से नियंत्रित करते हैं, जिसके लिए पैसे भी लिए जाते हैं। इसलिए मेटा को केवल मध्यस्थ नहीं, सेवा प्रदाता माना जाएगा।
सरकार का मानना है कि मेटा को कानूनी संरक्षण नहीं मिलना चाहिए और इस मुद्दे पर अंतिम फैसला न्यायपालिका करेगी। अधिकारियों ने बताया कि मेटा को सरकार के रुख से अवगत करा दिया गया है और जल्द ही इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
बाल यौन शोषण सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मेटा इंडिया के प्रमुख को तलब किया है। मेटा ने भारत सरकार के साइबर अपराध समन्वय केंद्र के साथ जानकारी साझा करने पर सहमति जताई है, जो पहले केवल अमेरिका की संस्था को दी जाती थी। इससे सोशल मीडिया पर बच्चों की सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
मेटा सहित अन्य सोशल मीडिया कंपनियों को भी इस तरह की जानकारी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ साझा करनी होगी। सरकार सोशल मीडिया को महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित बनाने के लिए कड़े सुरक्षा उपाय लागू कर रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सरकार मेटा से किस तरह की जिम्मेदारी बढ़ाना चाहती है?
- सरकार चाहती है कि मेटा अपने प्लेटफॉर्म पर साझा कंटेंट के प्रचार और वितरण को सक्रिय रूप से नियंत्रित करे।
- बाल यौन शोषण सामग्री रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
- राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मेटा इंडिया के प्रमुख को तलब किया है और मेटा ने जानकारी साझा करने पर सहमति जताई।
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