बीकानेर में भारत-अमेरिका युद्धाभ्यास 2026 शुरू
महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में 1200 सैनिक आतंकवाद विरोधी रणनीति का अभ्यास कर रहे हैं
राजस्थान के बीकानेर में भारत-अमेरिका युद्धाभ्यास 2026 शुरू हो गया है, जिसमें दोनों देशों के 1200 सैनिक आतंकवाद विरोधी अभियानों की रणनीतियों का अभ्यास कर रहे हैं। इस अभ्यास में आधुनिक हथियारों और तकनीकों का उपयोग करते हुए त्वरित प्रतिक्रिया, खुफिया आधारित सर्जिकल स्ट्राइक और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में काम करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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बीकानेर। राजस्थान के बीकानेर स्थित महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच द्विपक्षीय सैन्य सहयोग को मजबूत करने के लिए युद्धाभ्यास 2026 का औपचारिक आगाज हो चुका है। इस अभ्यास में दोनों देशों के 1200 सैनिक आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान आक्रामक कार्रवाई की रणनीति पर सघन अभ्यास कर रहे हैं।
इस युद्धाभ्यास का मुख्य केंद्र आतंकवाद विरोधी अभियानों में दुश्मन को उसके इलाके में घेरकर सटीक प्रहार करना है। दोनों देशों के सैनिक त्वरित प्रतिक्रिया दल तैयार करने, खुफिया इनपुट के आधार पर सर्जिकल स्ट्राइक जैसी रणनीतियां बनाने और आपात स्थिति में सटीक निशाना साधने का अभ्यास कर रहे हैं।
भारतीय सेना के 600 जवान और अमेरिकी सेना के 600 सैनिक विभिन्न कठिन युद्धाभ्यास सत्रों में हिस्सा ले रहे हैं। जवानों को वास्तविक युद्ध जैसी जटिल परिस्थितियों में काम करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे आपसी विश्वास और ऑपरेशनल समन्वय बढ़ सके।
इस अभ्यास में आधुनिक हथियारों और तकनीकों का व्यापक इस्तेमाल हो रहा है। सर्विलांस ड्रोन, आधुनिक असॉल्ट राइफलें, भारी आर्टिलरी और स्वायत्त प्रणालियों के माध्यम से दुश्मन के ठिकानों की टोह लेने और सटीक हवाई हमलों का अभ्यास किया जा रहा है।
युद्धाभ्यास का एक हिस्सा पर्वतीय और अर्ध-पर्वतीय क्षेत्रों में सैनिकों की आवाजाही, संचार व्यवस्था और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट पर केंद्रित है। विशेषज्ञ अधिकारी जवानों को विपरीत परिस्थितियों में जीवित रहने और मुकाबला जीतने की बारीकियों से अवगत करा रहे हैं।
यह अभ्यास सीमा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय शांति अभियानों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों सेनाएं अपने सामरिक अनुभव, तकनीक और युद्ध पद्धतियों को साझा कर वैश्विक स्तर पर साझा मिशनों के लिए पूरी तरह तैयार हो रही हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सैनिकों को किस प्रकार का प्रशिक्षण दिया जा रहा है?
- सैनिकों को वास्तविक युद्ध जैसी जटिल परिस्थितियों में काम करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि आपसी विश्वास और ऑपरेशनल समन्वय बढ़ सके।
- इस युद्धाभ्यास में कौन-कौन सी तकनीकें इस्तेमाल हो रही हैं?
- सर्विलांस ड्रोन, आधुनिक असॉल्ट राइफलें, भारी आर्टिलरी और स्वायत्त प्रणालियाँ प्रमुख तकनीकों में शामिल हैं।
- यह युद्धाभ्यास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्यों महत्वपूर्ण है?
- यह अभ्यास सीमा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय शांति अभियानों के लिए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है, जिससे दोनों सेनाएं साझा मिशनों के लिए तैयार होती हैं।
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