पाली में मंदिरों में भव्य सजावट के साथ कृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया
शहर के प्रमुख मंदिरों में 251 किलो विदेशी फूलों से सजावट, श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन किया
पाली में कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिरों और मोहल्लों में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का आयोजन किया गया। गोपीनाथ, रघुनाथ, वेंकटेश मंदिरों सहित विभिन्न स्थानों पर भजन-कीर्तन और पूजा-पाठ के साथ प्रसाद वितरित किया गया। युवाओं ने दही हांड़ी और भक्तों ने व्रत के साथ उत्सव मनाया।
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पाली। पाली में शुक्रवार रात 12 बजे कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर शहर के मंदिरों और मोहल्लों में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की रस्म धूमधाम से निभाई गई। गोपीनाथ मंदिर, रघुनाथ मंदिर, वेंकटेश मंदिर सहित कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन किया और प्रसाद ग्रहण किया।
रात 12 बजे मंदिरों में घंटे-घड़ियाल, ढोल-नगाड़े, झांझ-मजीरे और मृदंग की आवाज़ गूंज उठी। शंख की ध्वनि के बीच पंचगव्य से भगवान की पूजा की गई। गोपीनाथ मंदिर को खास तौर पर सजाया गया, जहां 251 किलो विदेशी फूलों से भगवान खाटू श्याम का दरबार सजा था।
रघुनाथ मंदिर, वेंकटेश मंदिर, गीता सत्संग भवन और भैरूघाट स्थित ब्राह्मण स्वर्णकार समाज के भवन में भी भव्य सजावट की गई। मंदिरों में श्रद्धालुओं को मिश्री-माखन और पिंजरी का प्रसाद दिया गया।
शहरवासियों ने मंदिरों में भगवान के दर्शन किए और कई ने बच्चों को कृष्ण और राधा के गेटअप में सजाकर दर्शन के लिए लाया। ये बच्चे लोगों का आकर्षण बने। पानी दरवाजा से वेंकटेश मंदिर तक रात में मेले जैसा माहौल रहा।
भैरूघाट चौराहे पर युवाओं ने दही हांडी फोड़ी। कई मंदिरों में रात 12 बजे तक भजन-कीर्तन का आयोजन भी हुआ। इसके बाद श्रद्धालु अपने घरों को लौटे और व्रत खोला।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- पाली में कृष्ण जन्माष्टमी कब मनाई गई?
- पाली में कृष्ण जन्माष्टमी शुक्रवार रात 12 बजे मनाई गई।
- मंदिरों में भक्तों को क्या प्रसाद दिया गया?
- मंदिरों में श्रद्धालुओं को मिश्री-माखन और पिंजरी का प्रसाद दिया गया।
- कृष्ण जन्मोत्सव पर क्या-क्या आयोजन हुए?
- भजन-कीर्तन, पंचगव्य पूजा, दही हांडी फोड़ना और भव्य सजावट के साथ मेले जैसा माहौल बना।
- बच्चों ने कृष्ण जन्माष्टमी पर कैसे भाग लिया?
- कई बच्चों को कृष्ण और राधा के गेटअप में सजाकर दर्शन के लिए लाया गया, जो लोगों का आकर्षण बने।
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