कुंडलपुर में सुगंध दशमी पर उत्तम संयम धर्म की पूजा-अर्चना
भगवान महावीर के पंचामृत अभिषेक के साथ मनाया गया पावन पर्व
कुंडलपुर में जैन धर्म के पर्व सुगंध दशमी पर भगवान महावीर का पंचामृत अभिषेक कर उत्तम संयम धर्म की पूजा-अर्चना की गई और श्रद्धालुओं ने मन, वचन तथा शरीर पर संयम का संदेश दिया। कार्यक्रम में झारखंड, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश सहित अन्य स्थानों से श्रद्धालु शामिल हुए और संयम तथा आत्म-शुद्धि का महत्व बताया गया।
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बाह। कुंडलपुर स्थित नंद्यावत परिसर में रविवार को जैन धर्म के पावन पर्व सुगंध दशमी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर का पंचामृत अभिषेक कर उत्तम संयम धर्म की पूजा-अर्चना की और मन, वचन तथा शरीर पर संयम का संदेश दिया।
पूजा कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय और बाहर से आए जैन श्रद्धालु शामिल हुए। उन्होंने नित्य नियम पूजन के बाद भगवान महावीर का पंचामृत अभिषेक किया और सुख, शांति तथा आत्मकल्याण की कामना की। शाम चार बजे धूप अर्पित करने की परंपरा के तहत धूप दशमी का आयोजन हुआ।
पंडित ज्ञानचंद्र जैन ने शास्त्र वाचन करते हुए बताया कि मनुष्य के पांच इंद्रियां स्पर्शन, रसना, घ्राण, चक्षु और कर्ण होती हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन के दो मार्ग हैं, योग और भोग, प्रवत्ति और निवृत्ति। संयम का अर्थ केवल बाहरी अनुशासन नहीं, बल्कि मन, वचन और शरीर पर नियंत्रण रखते हुए आत्मअनुशासन का पालन करना है।
उन्होंने कहा, "इच्छाओं को अपने अधीन रखना ही उत्तम संयम धर्म है।" संयम जीवन का संगीत, परम आनंद और आत्मा का सौंदर्य है जो सदगति प्राप्त करने का प्रमुख साधन है। संयम रहित जीवन मुर्दे के श्रृंगार के समान अप्रयोजनीय होता है।
कुंडलपुर के अलावा बाह के पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर और नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर जैतपुर में भी दशलक्षण महापर्व के छठे दिन उत्तम संयम धर्म का उत्सव मनाया गया। वहां श्रद्धालुओं ने मन, वचन और शरीर पर नियंत्रण रखकर आत्म-शुद्धि का संदेश दिया।
कार्यक्रम में झारखंड राज्य दिगंबर जैन धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष ताराचंद जैन, स्थानीय जैन मंदिर के अध्यक्ष राजेश जैन, मंत्री सुरेश पाटनी समेत कई जैन समाज के महिला-पुरुष सदस्य उपस्थित थे। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से भी श्रद्धालु आए थे।
अभिषेक जैन ने बताया कि उपवास करने वालों का पारण पूर्णिमा को होगा। इस प्रकार जैन समुदाय ने संयम और आध्यात्मिक उन्नति का संदेश फैलाया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- उत्तम संयम धर्म का क्या अर्थ है?
- यह केवल बाहरी अनुशासन नहीं, बल्कि इच्छाओं को अपने अधीन रखते हुए आत्मअनुशासन का पालन है।
- पूजा कार्यक्रम में किन प्रमुख व्यक्तिें की उपस्थिति हुई?
- झारखंड राज्य दिगंबर जैन धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष ताराचंद जैन, स्थानीय मंदिर के अध्यक्ष राजेश जैन, और मंत्री सुरेश पाटनी उपस्थित थे।
- छठे दिन किन मंदिरों में उत्तम संयम धर्म की पूजा हुई?
- बाह के पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर और नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर जैतपुर में उत्सव मनाया गया।
- उपवास करने वालों का पारण कब होगा?
- उपवास करने वालों का पारण पूर्णिमा के दिन किया जाएगा।
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