सुप्रीम कोर्ट ने शराबबंदी के पांच नुकसान गिनाए, 600 से अधिक मौतों का जिक्र
कोर्ट ने महाराष्ट्र के नियम रद्द किए, जहरीली शराब की घटनाओं को चेतावनी बताया
सुप्रीम कोर्ट ने शराबबंदी के पांच प्रमुख नुकसान बताए हैं और महाराष्ट्र के मेथनॉल नियंत्रण नियमों को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने जहरीली शराब की घटनाओं में 600 से अधिक मौतों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रतिबंध से अवैध गतिविधियां बढ़ती हैं और राज्य की कार्रवाई प्रभावी नहीं साबित हुई।
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सुप्रीम कोर्ट ने शराबबंदी से जुड़ी पांच बड़ी समस्याओं को उजागर किया है। कोर्ट ने कहा कि 600 से अधिक लोगों की मौतों के बावजूद प्रतिबंध से कई खतरनाक स्थिति पैदा होती हैं। महाराष्ट्र के नियमों को रद्द करते हुए कोर्ट ने जहरीली शराब की घटनाओं को अधिकारियों के लिए चेतावनी बताया।
कोर्ट की टिप्पणियां और नियम रद्दीकरण
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने महाराष्ट्र के नियम 18A और 18B को रद्द कर दिया है। ये नियम मेथनॉल की खरीद पर नियंत्रण के लिए बनाए गए थे, जिसमें गैर-दवा निर्माताओं को उसमें कड़वा पदार्थ और रंग मिलाना अनिवार्य था। कोर्ट ने कहा कि राज्य यह साबित करने में असफल रहा कि इस प्रक्रिया से मेथनॉल के इस्तेमाल को रोकना या हतोत्साहित करना प्रभावी होगा। पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि अन्य मिलावटी पदार्थों से बनने वाली अवैध शराब को रोकने के लिए राज्य की क्या योजना है।
शराबबंदी के नुकसान और जहरीली शराब की घटनाएं
हाल में गुजरात के भावनगर और मध्य प्रदेश के सागर में जहरीली शराब की घटनाएं हुईं, जिनमें क्रमशः 13 और 15 लोगों की मौत हुई। ये घटनाएं अधिकारियों के लिए चेतावनी हैं।
शराबबंदी के नियमों की पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि ये नियम 1991 में मुंबई में मेथनॉल मिली नकली शराब पीने से 93 लोगों की मौत के बाद बनाए गए थे। पीठ ने स्पष्ट किया कि वह राज्य की मंशा पर सवाल नहीं उठा रही है, लेकिन केवल मंशा के आधार पर किसी नियम को मनमाना होने की कसौटी से मुक्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार की दलील को खारिज करते हुए कहा कि नियमों का जहरीली शराब की घटनाओं को रोकने से कोई तार्किक संबंध नहीं दिखता।
शराब पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने से राजस्व का नुकसान, प्रतिबंध लागू कराने पर खर्च, पुलिस में भ्रष्टाचार, अवैध शराब बनाने और नशीली दवाओं से जुड़ी समस्या जैसे खतरे पैदा हो सकते हैं
कोर्ट
इतिहास बताता है कि पूरी तरह शराबबंदी कई बार शराब के कारोबार को भूमिगत कर देती है
पीठ
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के नियम 18A और 18B को क्यों रद्द किया?
- कोर्ट ने पाया कि ये नियम मेथनॉल के इस्तेमाल को रोकने में प्रभावी नहीं थे और राज्य ने इसका प्रभाव दिखाने में असफलता व्यक्त की।
- शराबबंदी के नियमों के बावजूद जहरीली शराब की घटनाएं कैसे बढ़ रही हैं?
- लगता है कि नियमों के बावजूद अवैध शराब उत्पादन और मिलावट जारी है, जिसके कारण जहरीली शराब की घटनाएं नहीं रुकीं।
- सरकार को अवैध शराब की समस्या से निपटने के लिए क्या करना चाहिए?
- सरकार को मिलावट रोकने के लिए प्रभावी योजना बनानी होगी और पारदर्शिता व कड़ाई के साथ नियम लागू करने होंगे।
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