मध्य प्रदेश के किसान राम महाजन ने मिक्स खेती से बढ़ाई आमदनी
केले की खेती छोड़कर ऑर्गेनिक और मिक्स खेती अपनाकर किसान ने रोजगार भी दिया
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के किसान राम महाजन ने केले की खेती छोड़कर मिक्स और ऑर्गेनिक खेती अपनाई है, जिससे उनकी आमदनी बढ़ी है और लगभग 10 से 15 लोगों को रोजगार मिला है। मिक्स खेती और जैविक खाद के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और बाजार में ऑर्गेनिक फसलों की मांग बढ़ रही है। भारत में मिट्टी की खराबी की समस्या को देखते हुए, खेती के आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल तरीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
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मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के किसान राम महाजन ने दोस्त की सलाह पर केले की खेती छोड़कर मिक्स और ऑर्गेनिक खेती शुरू की। करीब 10 एकड़ में केले, कपास, तुअर और सब्जियां उगाकर वे अपनी आमदनी बढ़ाने के साथ 10 से 15 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।
राम महाजन के परिवार में पहले मुख्य रूप से केले की खेती होती थी, जिसमें उत्पादन बढ़ाने के लिए रासायनिक खाद और पेस्टिसाइड का इस्तेमाल होता था। समय के साथ उन्होंने खेती का तरीका बदलने का फैसला किया और दोस्त के सुझाव पर मिक्स खेती के साथ ऑर्गेनिक खेती अपनाई। खेत में घर पर तैयार जैविक खाद का उपयोग किया जाता है, जिससे मिट्टी की सेहत बेहतर होती है और फसल की गुणवत्ता भी अच्छी रहती है।
राम महाजन बताते हैं कि अब अलग-अलग फसलों के उत्पादन से उनकी आमदनी के कई रास्ते बन गए हैं। ऑर्गेनिक फसलों की मांग बाजार में बढ़ रही है, जिससे उन्हें बेहतर दाम मिल रहे हैं। खेती के काम में वे करीब 10 से 15 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। उनकी कहानी दिखाती है कि खेती में नवाचार से किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं और रोजगार भी पैदा कर सकते हैं।
भारत की करीब एक-तिहाई जमीन की मिट्टी खराब हो चुकी है, जो खेती की उत्पादकता, किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2024 तक देश के कुल क्षेत्रफल का लगभग 33 प्रतिशत हिस्सा मिट्टी खराब होने की समस्या से प्रभावित था। मिट्टी की खराब स्थिति से खेती की जमीन की उत्पादन क्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे कृषि उत्पादन और किसानों की आजीविका पर खतरा बढ़ता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि खराब हो चुकी जमीन को फिर से उपजाऊ बनाने के लिए खेती के तरीके में बदलाव जरूरी है। इसके लिए रीजनरेटिव एग्रीकल्चर को बढ़ावा देना होगा, जो मिट्टी की सेहत, जैव विविधता, पानी और कृषि पर्यावरण को बेहतर बनाता है। इसमें कम जुताई, फसल चक्र बदलना, पेड़ों के साथ खेती और पशुपालन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।
हालांकि, इस तरह की खेती को बड़े स्तर पर लागू करना आसान नहीं है। शुरुआती लागत अधिक होती है, किसानों को वित्तीय मदद मिलना मुश्किल होता है, और उत्पादन में शुरुआत में कमी की आशंका होती है। भारत में नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के लिए 2,481 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, जिसका लक्ष्य एक करोड़ किसानों को प्रशिक्षण देना है। इसके अलावा, जैविक खेती करने वाले समूहों को तीन साल के लिए प्रति हेक्टेयर 31,500 रुपये दिए जाते हैं।
दैनिक जागरण के अनुसार, मखाना की खेती के बाद तालाब में मछली पालन से किसानों को दोहरी आमदनी का मौका मिलेगा। आत्मा प्रबंधन समिति की बैठक में इस मॉडल पर चर्चा हुई है। तालाब में मखाना निकलने के बाद कई महीने खाली रहने की समस्या को दूर कर मछली पालन से किसानों की आय बढ़ेगी। इससे जल संसाधनों का पूर्ण उपयोग होगा और किसान अतिरिक्त आमदनी कमा सकेंगे।
अंजनी कुमार ने बताया कि मखाना निकलने के बाद तालाब कई महीने खाली रह जाता है। आत्मा सुदामा ठाकुर ने कहा, "आधुनिक तकनीक और विभागीय योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाना लक्ष्य है।" तालाबों में जलकुंभी जैसी समस्या को खाद में बदलकर खेतों में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे पर्यावरण को भी लाभ होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- मिक्स खेती में क्या-क्या फसलें उगाई जाती हैं?
- मिक्स खेती में केले, कपास, तुअर और सब्जियां शामिल हैं जो आय के कई स्रोत बनाते हैं।
- ऑर्गेनिक खेती से मिट्टी पर क्या प्रभाव पड़ता है?
- ऑर्गेनिक खेती में जैविक खाद का उपयोग मिट्टी की सेहत और फसल की गुणवत्ता दोनों सुधारता है।
- रोजगार के अवसर कैसे बढ़ाए गए हैं?
- राम महाजन की खेती में 10-15 लोगों को रोजगार मिला है, जिससे स्थानीय रोजगार बढ़ा है।
- नीति स्तर पर किस तरह की मदद मिल रही है?
- नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के अंतर्गत किसानों को प्रशिक्षण और प्रति हेक्टेयर आर्थिक सहायता दी जाती है।
- तालाब में मछली पालन का किसानों के लिए क्या लाभ है?
- मखाना निकलने के बाद खाली तालाब में मछली पालन से किसानों को जल संसाधन का बेहतर उपयोग कर दोहरी आमदनी मिलती है।
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