मेरठ में दशलक्षण महापर्व पर उत्तम क्षमा धर्म की पूजा-अर्चना
श्रद्धालुओं ने मन, वचन और कर्म की भूलों के लिए क्षमा याचना की
मेरठ के साकेत स्थित दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण महापर्व के अवसर पर उत्तम क्षमा धर्म की पूजा-अर्चना आयोजित की गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने मन, वचन और कर्म से हुई भूलों के लिए क्षमा मांगते हुए क्रोध त्यागने का संकल्प लिया। समारोह में जैन समाज के गणमान्य लोग और श्रद्धालु शामिल हुए तथा महिलाओं द्वारा भजन प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस पर्व के दौरान विभिन्न मंदिरों में भगवान जिनेश्वर देव की पूजा और शांति धारा का भी आयोजन हुआ।
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मेरठ। मेरठ के साकेत स्थित दिगंबर जैन मंदिर में बुधवार को दशलक्षण महापर्व के अवसर पर उत्तम क्षमा धर्म की विशेष पूजा की गई। श्रद्धालुओं ने मन, वचन और कर्म से हुई भूलों के लिए क्षमा मांगते हुए क्रोध त्यागने का संकल्प लिया।
सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था। उन्होंने भगवान जिनेंद्र देव की पूजा-अर्चना कर धर्मलाभ प्राप्त किया। पूजा के दौरान भक्तिभाव से मन, वचन और कर्म की गलतियों के लिए क्षमा याचना की गई। साथ ही सभी जीवों के प्रति मैत्री और करुणा का भाव रखने का संकल्प लिया गया।
जैन धर्म में दशलक्षण महापर्व के प्रथम धर्म उत्तम क्षमा को आत्मशुद्धि और संयम का प्रतीक माना जाता है। विधि-विधान के साथ हुई पूजा के दौरान मंदिर परिसर धार्मिक जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने उत्तम क्षमा के संदेश को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
मंदिर समिति के पदाधिकारियों और समाज के गणमान्य लोगों ने भी पूजा में भाग लिया। जैन समाज के बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। सायंकाल में श्रीजी एवं मुनि श्री की महाआरती हुई।
महिला मंडल लालपुरा की ओर से भजन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
साकेत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व शांति एवं सर्वोदय के लिए विधान हुआ। सदर के दुर्गाबाड़ी स्थित भगवान पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में भी पर्व का शुभारंभ हुआ। श्रद्धालुओं ने भगवान का अभिषेक और शांतिधारा कर पूजन-विधान किया।
मूलनायक चंद्रप्रभु भगवान की वेदी पर पारसनाथ जैन, प्रियांशु जैन, वसु जैन, पुनीत जैन, नमन जैन एवं संदीप जैन ने पूजन किया। जिनशासन नायक भगवान महावीर की वेदी पर लोकेश जैन, प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की वेदी पर राजीव जैन तथा सराजयती मंदिर के मूलनायक भगवान नेमिनाथ की वेदी पर राहुल जैन ने दशलक्षण पूजा की।
जैन धर्म का यह महापर्व प्रकृति और पर्यावरण से भी जुड़ा हुआ है। जैन संत मुनि श्री 108 सुयश सागर महाराज के ससंघ के सानिध्य में दस दिनों तक शिविर में बैठने वाले श्रावकों को विशेष पूजा, नियम और व्रत दिए गए।
पंडित अभिषेक शास्त्री ने शांति धारा के पूर्व की विधि को मूल नायक पारसनाथ भगवान का प्रथम अभिषेक और शांति धारा करने का सौभाग्य सुरेश कुमार, नरेंद्र झांझरी परिवार को मिला। भगवान महावीर का प्रथम अभिषेक व शांति धारा का सौभाग्य ललित सिद्धांत सेठी, महावीर प्रसाद, तारा देवी सेठी, सिलचर को प्राप्त हुआ। मंडप पर अखंड दीपक स्थापनकर्ता का सौभाग्य सुरेंद्र सरिता काला परिवार को मिला।
उत्तम क्षमा का संदेश
जैन धर्म के अनुयायी रतन जैन ने कहा, "उत्तम क्षमा धर्म श्रद्धालुओं को गलतियों के लिए क्षमा मांगने में मदद करता है।" आर्जव सागर महाराज ने बताया, "क्रोध का अभाव ही क्षमा है।" उन्होंने बताया कि मन रूपी उपवन में यदि क्षमा का पुष्प खिल जाए तो चंचल मन निश्चय से शांति की ओर अग्रसर हो जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- दशलक्षण महापर्व में श्रद्धालुओं ने क्या संकल्प लिया?
- श्रद्धालुओं ने मन, वचन और कर्म से हुई भूलों के लिए क्षमा मांगने और सभी जीवों के प्रति मैत्री व करुणा का भाव रखने का संकल्प लिया।
- जैन धर्म में उत्तम क्षमा का क्या महत्व है?
- उत्तम क्षमा आत्मशुद्धि और संयम का प्रतीक मानी जाती है, जो जीवन में शांति और संतुलन लाने में सहायता करती है।
- पूजा में किन वेदियों पर पूजा-अर्चना हुई?
- मूलनायक चंद्रप्रभु, महावीर, ऋषभदेव और नेमिनाथ की वेदियों पर पारसनाथ जैन, लोकेश जैन, राजीव जैन, राहुल जैन सहित अन्य लोगों ने पूजा की।
- दशलक्षण महापर्व और पर्यावरण का क्या संबंध है?
- जैन धर्म का यह महापर्व प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण से जुड़ा हुआ है, और संत मुनि श्री 108 सुयश सागर महाराज के ससंग में श्रावकों को विशेष नियम और व्रत दिए जाते हैं।
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