नासा ने चंद्रमा पर 222 मीटर चौड़ा नया विशाल गड्ढा खोजा
मई 2024 में बने इस क्रेटर का नाम थॉमस मैकगेटचिन के नाम पर रखा गया
नासा के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर ने चंद्रमा पर 222 मीटर चौड़ा और 43 मीटर गहरा नया क्रेटर खोजा है, जो मई 2024 में एक बड़े उल्कापिंड के टक्कर से बना था। यह क्रेटर चंद्रमा पर हर 132 साल में बनने वाले बड़े क्रेटर्स में से एक है और वैज्ञानिक इसे इम्पैक्ट प्रक्रिया के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं।
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कैलिफोर्निया। नासा के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर ने चंद्रमा पर मई 2024 में बने सबसे बड़े नए क्रेटर की खोज की है। यह गड्ढा 222 मीटर चौड़ा और औसतन 43 मीटर गहरा है। वैज्ञानिकों के अनुसार ऐसे बड़े क्रेटर चंद्रमा पर औसतन हर 132 साल में एक बार बनते हैं।
मैकगेटचिन क्रेटर चंद्रमा के पूर्वी किनारे पर हाईलैंड और मारे क्षेत्र की सीमा के पास स्थित है। यह गड्ढा किसी बड़े उल्कापिंड की टक्कर से बना था, जिसकी ऊर्जा से सतह पर गहरा गड्ढा और आसपास 7 किलोमीटर चौड़ा ठंडा क्षेत्र बना।
नासा की टीम ने पुरानी और नई तस्वीरों की तुलना कर इस क्रेटर की पहचान की। 2025 में वाइड एंगल कैमरा की इमेज में चमकदार धब्बा दिखा, जिसके बाद नैरो एंगल कैमरा से डिटेल तस्वीरें ली गईं। इससे पता चला कि यह टक्कर अप्रैल से मई 2024 के बीच हुई थी।
टक्कर से निकली चट्टानें और धूल सैकड़ों मीटर तक फैली हैं। क्रेटर की दीवारें औसतन 24 डिग्री की ढलान वाली हैं, कुछ जगह 40 डिग्री तक। सतह के नीचे 20 मीटर से अधिक गहराई की सामग्री बाहर निकली है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि यह इम्पैक्ट प्रक्रिया का अध्ययन करने के लिए एक प्राकृतिक प्रयोगशाला है क्योंकि अंतरिक्ष के मौसम और छोटे उल्कापिंडों से अभी इसे नुकसान नहीं पहुंचा है। इससे इम्पैक्ट की मैकेनिक्स और सतह में बदलाव के मॉडल को सुधारने में मदद मिलेगी।
यह खोज चंद्रमा पर मानवीय मिशनों और बेस बनाने के लिए भी उपयोगी जानकारी दे सकती है। अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ ने इस क्रेटर का नाम थॉमस मैकगेटचिन के सम्मान में रखा है, जो अपोलो युग के चंद्र वैज्ञानिक थे और इम्पैक्ट क्रेटरों के मलबे के मॉडल पर काम किया।
यह घटना बताती है कि चंद्रमा अभी भी सक्रिय है और नासा के ऑर्बिटर लगातार तस्वीरें लेकर इन बदलावों को पकड़ते हैं। बिना नियमित निगरानी के यह क्रेटर लंबे समय तक अनदेखा रह सकता था। वैज्ञानिक इस क्रेटर का और अध्ययन कर रहे हैं ताकि इम्पैक्ट प्रक्रिया को बेहतर समझ सकें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- मैकगेटचिन क्रेटर कहाँ पर स्थित है?
- यह हाईलैंड और मारे क्षेत्र की सीमा के पास चंद्रमा के पूर्वी किनारे पर है।
- इस क्रेटर के बनने से क्या प्रभाव हुए हैं?
- टक्कर की ऊर्जा से सतह पर गहरा गड्ढा बना और आसपास 7 किलोमीटर चौड़ा ठंडा क्षेत्र विकसित हुआ।
- क्रेटर की दीवारों की ढलान कितनी है?
- औसतन 24 डिग्री की ढलान है, जबकि कुछ जगहों पर यह 40 डिग्री तक पहुंचती है।
- इस खोज का वैज्ञानिक महत्व क्या है?
- यह क्रेटर इम्पैक्ट प्रक्रिया के अध्ययन के लिए प्राकृतिक प्रयोगशाला साबित हो रहा है और अंतरिक्ष के मौसम से अभी तक प्रभावित नहीं हुआ है।
- इस क्रेटर का नाम क्यों रखा गया है?
- इसका नाम थॉमस मैकगेटचिन के सम्मान में रखा गया है, जो अपोलो युग के चंद्र वैज्ञानिक थे।
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