पटना हाई कोर्ट ने नालंदा DM को CCA दुरुपयोग पर फटकार लगाई
पीड़ितों को 1-1 लाख रुपये मुआवजा और मुकदमा खर्च का आदेश दिया
पटना हाई कोर्ट ने नालंदा के जिलाधिकारी द्वारा बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम के दुरुपयोग पर कड़ी टिप्पणी की है और दोनों याचिकाकर्ताओं को 1-1 लाख रुपये मुआवजे एवं मुकदमा खर्च देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने जिलाधिकारी के आदेश को रद्द करते हुए अस्पतालों के बीच समन्वय की कमी और न्याय प्रक्रिया में उचित कारणों की जांच की आवश्यकता जताई है।
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पटना हाई कोर्ट ने नालंदा जिले में बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम के दुरुपयोग पर जिलाधिकारी को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने पीड़ितों को 1-1 लाख रुपये मुआवजा और मुकदमा खर्च देने का आदेश दिया है।
न्यायाधीश राजीव रंजन प्रसाद और सुनील दत्ता मिश्रा की खंडपीठ ने नालंदा के जिलाधिकारी द्वारा पारित सीसीए के आदेश को रद करते हुए राज्य सरकार को दोनों याचियों को 1-1 लाख रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च देने का निर्देश दिया है।
कटौना गांव के निवासी शशि कुमार उर्फ फुकन और अजय सिंह ने पटना हाई कोर्ट में याचिका दायर कर जिलाधिकारी के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें 'असामाजिक तत्व' घोषित कर दिया गया था। उन्हें अपने नजदीकी थाने के बजाय 40 किलोमीटर दूर सिलाव थाने में सप्ताह में तीन दिन हाजिरी लगाने का निर्देश दिया गया था।
कोर्ट ने कहा कि दोनों मुकदमों में तीन साल का अंतर है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि याची आदतन अपराधी हैं। पीठ ने यह भी कहा कि मामला केवल नवजात को पर्याप्त इलाज न मिलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था से जुड़े व्यापक सवाल उठते हैं।
केजीएमयू के चिकित्सकों ने बताया कि बच्चे को एंबुलेंस से लाया गया था, लेकिन नवजात गहन चिकित्सा इकाई में बेड उपलब्ध नहीं था। कोर्ट ने अस्पतालों के बीच समन्वय की कमी को गंभीर मरीज की हालत बिगाड़ने वाला बताया।
पीठ ने कहा कि आरोपितों को गिरफ्तारी के आधार और कारण बरामदगी मेमो के माध्यम से बताए गए थे और उसकी प्रति भी दी गई थी। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी और भारी मात्रा में इलेक्ट्रानिक उपकरण बरामद होने के कारण जांच में समय लगा।
कोर्ट ने कहा कि प्रत्येक मामले में यह तथ्यात्मक रूप से देखना होगा कि संबंधित व्यक्ति जनजाति के रीति-रिवाजों और परंपराओं का पालन करता है, और समुदाय उसे अपना सदस्य मानता है अथवा नहीं।
शर्मा की पीठ ने मामले पर 26 नवंबर को सुनवाई और उसी दिन निर्णय सुनाने का आदेश दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- नालंदा DM पर क्या आरोप थे?
- जिलाधिकारी ने शशि कुमार और अजय सिंह को 'असामाजिक तत्व' घोषित किया था और उन्हें दूर के थाने में हाजिरी लगाने का निर्देश दिया था।
- कोर्ट ने चिकित्सा व्यवस्था पर क्या टिप्पणी की?
- कोर्ट ने कहा कि नवजात को पर्याप्त इलाज न मिलने की समस्या प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था से जुड़े व्यापक सवाल उठाती है।
- बच्चे को इलाज के दौरान क्या समस्या आई?
- केजीएमयू के चिकित्सकों के अनुसार एंबुलेंस से लाए गए नवजात के लिए गहन चिकित्सा इकाई में बेड उपलब्ध नहीं था।
- अभियोजन में विलंब का कारण क्या बताया गया?
- कोर्ट ने बताया कि जप्त की गई भारी इलेक्ट्रॉनिक सामग्री और बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के कारण जांच में समय लगा।
- कोर्ट ने जनजाति अधिकार मामले में क्या निर्देश दिए?
- हर मामले में यह देखना होगा कि संबंधित व्यक्ति जनजाति के रीति-रिवाजों का पालन करता है या नहीं और क्या समुदाय उसे सदस्य मानता है।
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