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बसपा में ससुर-दामाद के बीच सत्ता संघर्ष तेज

रामजी गौतम और अशोक सिद्धार्थ गुटों के बीच वर्चस्व की जंग जारी

बसपा में ससुर अशोक सिद्धार्थ और दामाद आकाश आनंद के बीच सत्ता संघर्ष गहराता जा रहा है। पार्टी के इकलौते राज्यसभा सांसद रामजी गौतम और उनके समर्थकों के खिलाफ यह जंग अब खुलकर सामने आई है।
AI सार

बसपा में ससुर अशोक सिद्धार्थ और दामाद आकाश आनंद के बीच सत्ता संघर्ष गहरा गया है, जो पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजी गौतम और उनके समर्थकों के खिलाफ है। मायावती ने परिवारवाद को बढ़ावा न देने का संकल्प जताते हुए आकाश आनंद के अनुशासनहीन व्यवहार की जानकारी मिलने पर उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने से परहेज किया है। आगामी चुनावों में आकाश आनंद की भूमिका सीमित रहने से बसपा को युवा दलित चेहरे की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

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बसपा के ससुर-दामाद के बीच सत्ता संघर्ष
बसपा के ससुर-दामाद के बीच सत्ता संघर्ष / प्रतीकात्मक चित्र · निहारिका टाइम्स

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बसपा में ससुर अशोक सिद्धार्थ और दामाद आकाश आनंद के बीच सत्ता संघर्ष गहराता जा रहा है। पार्टी के इकलौते राज्यसभा सांसद रामजी गौतम और उनके समर्थकों के खिलाफ यह जंग अब खुलकर सामने आई है।

बसपा के अंदर दो प्रमुख गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। एक तरफ लखीमपुर खीरी से आने वाले रामजी गौतम और उनके समर्थक हैं, तो दूसरी ओर अशोक सिद्धार्थ और आकाश आनंद का गुट है। इस संघर्ष में फिलहाल ससुर-दामाद की जोड़ी कमजोर नजर आ रही है।

रामजी गौतम को पार्टी में आगे बढ़ाने वाले अशोक सिद्धार्थ ही थे, लेकिन समय के साथ दोनों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ी। जब भी अशोक सिद्धार्थ पार्टी में मजबूत हुए, रामजी गौतम के पांव तले जमीन खिसकी। इसके उलट, अशोक सिद्धार्थ के कमजोर पड़ने पर रामजी गौतम का कद बढ़ा। अशोक सिद्धार्थ को 10 राज्यों के सेक्टर-1 का प्रभार दिया गया।

अशोक सिद्धार्थ ने अपने संन्यास पत्र में संकेत दिए कि उनके राजनीतिक विरोधी मायावती के कान भर रहे हैं। उन्हें बताया गया कि आकाश आनंद के जरिए पूरी पार्टी पर कब्जा करने की कोशिश हो रही है। इसके बाद मायावती ने आकाश की बजाय उनके छोटे भाई ईशान आनंद को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी।

आकाश आनंद ने बार-बार आरोप लगने, पार्टी से निकालने और फिर शामिल करने के कारण पार्टी में पद लेने से मना कर दिया है। उन्होंने मायावती की पोस्ट री-पोस्ट करना भी बंद कर दिया है। उनके पिता आनंद कुमार और परिवार के अन्य सदस्य आकाश को शांत करने की कोशिश कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में चुनावों के मद्देनजर अगर आकाश आनंद पूरी तरह किनारे रहते हैं, तो बसपा को युवा दलित चेहरे की कमी का सामना करना पड़ सकता है। इसका फायदा आजाद समाज पार्टी और सपा-कांग्रेस गठबंधन उठा सकते हैं।

बसपा प्रमुख मायावती ने अपने सभी फैसलों में परिवारवाद को बढ़ावा न देने का संकल्प जताया है। पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारी भी अशोक और आकाश के साथ नहीं हैं, इसलिए ससुर-दामाद कानूनी तौर पर पार्टी पर कब्जा नहीं कर सकते।

इस पूरे घटनाक्रम में बसपा के रणनीतिकार सतीश चंद्र मिश्र की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है। उन्होंने मायावती को आकाश आनंद के अनुशासनहीन व्यवहार की जानकारी दी, जिससे पार्टी में माहौल बिगड़ा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रामजी गौतम और अशोक सिद्धार्थ के बीच संघर्ष कैसे बढ़ा?
अशोक सिद्धार्थ ने रामजी गौतम को पार्टी में आगे बढ़ाया था, लेकिन बाद में दोनों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ गई और उनकी स्थिति एक-दूसरे के कमजोर या मजबूत होने पर बदलती रही।
मायावती ने आकाश आनंद को किन जिम्मेदारियां दी हैं?
मायावती ने आकाश की बजाय उनके छोटे भाई ईशान आनंद को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है, जिससे आकाश के कब्जा करने के प्रयास को कमजोर किया गया।
बसपा के अंदर चल रही इस जंग का चुनाव पर क्या प्रभाव हो सकता है?
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में युवा दलित चेहरे की कमी के कारण बसपा को नुकसान हो सकता है, जिसका फायदा आजाद समाज पार्टी और सपा-कांग्रेस गठबंधन उठा सकते हैं।

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Published11 सितंबर 2026, 10:21 IST IST
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