अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लिया, मायावती से कहा दामाद को गुमराह नहीं कर रहा
बसपा के पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ ने 10 सितंबर को राजनीति से संन्यास लिया। उनके ससुर आकाश आनंद ने मायावती से कहा कि वे दामाद को गुमराह नहीं कर रहे हैं।
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बसपा के पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ ने 10 सितंबर को राजनीति से संन्यास लिया। उनके ससुर आकाश आनंद ने मायावती से कहा कि वे दामाद को गुमराह नहीं कर रहे हैं।
बसपा के पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास लिया। उन्होंने मायावती को भावुक पत्र लिखकर पार्टी पर कब्जे के आरोपों का खंडन किया।
मायावती ने BSP की 2027 चुनाव रणनीति में अकेले चुनाव लड़ने, ब्राह्मण चेहरे पर दांव और परिवार के राजनीतिक पदों पर रोक जैसे बड़े बदलाव किए हैं।
बसपा अध्यक्ष मायावती ने भतीजों पर बड़ा फैसला सुनाया है। आनंद कुमार की बेटी दीपिका को मदद मिलेगी, परिवार के अन्य सदस्यों को नहीं।
मायावती ने बताया कि अशोक सिद्धार्थ के संन्यास से पहले पूरी रात रोकथाम की कोशिशें हुईं और विपक्षी दलों पर तीखा हमला किया। पार्टी को जल्द और जानकारी दी जाएगी।
दिल्ली चुनाव में हार के बाद बसपा प्रमुख मायावती ने अपने समधी अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निष्कासित कर दिया।
बसपा में रामजी गौतम और अशोक सिद्धार्थ गुटों के बीच सत्ता संघर्ष बढ़ा। आकाश आनंद के राजनीतिक करियर पर विवाद, मायावती ने परिवारवाद से दूरी बनाई।
मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह मुक्त किया। पारिवारिक स्वार्थ को पार्टी हित से ऊपर रखने का आरोप लगाया। 3 सितंबर 2026 को पद से भी मुक्त किया गया था।
बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि आकाश आनंद की पार्टी में वापसी तभी संभव है जब उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ पूरी तरह राजनीति से संन्यास लें।
बसपा प्रमुख मायावती ने पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने का संदेश दिया, ताकि आकाश आनंद को पार्टी में सक्रिय भूमिका मिल सके।
मंत्री संजय निषाद ने कहा कि आकाश आनंद को पार्टी में शामिल होने पर उनकी पसंद का पद और सम्मान मिलेगा। मायावती ने आकाश को फिलहाल बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी है।