राजा भैया को सीबीआई कोर्ट से बड़ी राहत मिली
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दोबारा जांच के बाद क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार
लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने जियाउल हक हत्याकांड में राजा भैया के खिलाफ कार्रवाई की मांग खारिज करते हुए सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली है, जिसमें उनके खिलाफ अभियोजन के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। इसके बाद राजा भैया को इस मामले में कानूनी राहत मिली है, जबकि अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने अक्टूबर 2023 में जियाउल हक हत्याकांड की दोबारा जांच शुरू की। लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने 22 दिसंबर 2023 को दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए पूर्व मंत्री राजा भैया के खिलाफ कार्रवाई की मांग खारिज कर दी।
प्रतापगढ़ के कुंडा क्षेत्र के बलीपुर गांव में 2 मार्च 2013 को ग्राम प्रधान नन्हे यादव की हत्या के बाद बिगड़े हालात को संभालने पहुंचे पुलिस उपाधीक्षक (सीओ) जियाउल हक को भीड़ ने घेर लिया। उन्हें लाठी-डंडों से पीटकर गोली मार दी गई, जिससे उनकी मौत हो गई।
इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। सीबीआई ने 31 जुलाई 2013 को राजा भैया के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में पहली क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। मृतक सीओ की पत्नी परवीन आजाद ने इस रिपोर्ट का विरोध करते हुए दोबारा जांच की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने अक्टूबर 2023 में मामले की पुनः जांच शुरू की। इसके बाद 22 दिसंबर 2023 को नई क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई, जिसमें राजा भैया को आरोपी नहीं बनाया गया और उनके खिलाफ अभियोजन के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले।
लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने इस रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए राजा भैया के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की मांग को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि उनके खिलाफ मामले को आगे बढ़ाने का कोई ठोस आधार नहीं है।
इस फैसले से राजा भैया को इस मामले में कानूनी मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है। हालांकि, इस हत्याकांड में अन्य आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्कालीन राज्य सरकार ने जांच पुलिस से हटाकर सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई ने सभी संबंधित मामलों को एक साथ जोड़कर चार्जशीट दाखिल की थी।
3 मार्च 2013 को मृतक सीओ की पत्नी परवीन आजाद ने पुलिस में चौथी एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें स्थानीय विधायक राजा भैया को आरोपी बनाया गया था।
9 अक्टूबर 2024 को कोर्ट ने इस मामले में सभी आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई थी।
सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को अदालत ने स्वीकार किया है, जिससे राजा भैया को राहत मिली है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- जियाउल हक हत्याकांड कब हुआ था?
- जियाउल हक की हत्या 2 मार्च 2013 को हुई थी, जब उन्हें भीड़ ने लाठी-डंडों से मारकर गोली मारी थी।
- सीबीआई ने पहली जांच कब और क्या रिपोर्ट पेश की थी?
- सीबीआई ने 31 जुलाई 2013 को पहली क्लोजर रिपोर्ट पेश की, जिसमें राजा भैया के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाए गए।
- राजा भैया को राहत क्यों मिली है?
- क्योंकि अदालत ने उनके खिलाफ मामलों को आगे बढ़ाने के लिए कोई ठोस आधार नहीं पाया है।
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