सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा, क्यों नहीं फ्रीज किया शिवसेना का चुनाव चिह्न
शिवसेना विवाद पर सुनवाई में आयोग की कार्यशैली पर सवाल, 6 अक्टूबर को उपचुनाव
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा कि शिवसेना के विवादित दो गुटों में होने के बावजूद चुनाव चिह्न क्यों फ्रीज नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग को दोनों गुटों को नया चिह्न देकर जनता के सामने बराबर प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए थी। पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होंगे।
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को चुनाव आयोग की कार्यशैली पर सवाल उठाए और पूछा कि अगर दोनों गुट खुद को असली शिवसेना बता रहे थे तो आयोग ने चुनाव चिह्न क्यों फ्रीज नहीं किया। यह सुनवाई ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के मामले में 16 सितंबर को जारी आधिकारिक पत्र के तहत हो रही है। पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव 6 अक्टूबर को होंगे।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने शिवसेना विवाद पर सुनवाई के दौरान कहा कि चुनाव आयोग के पास एक विकल्प था कि वह पार्टी का चुनाव चिह्न फ्रीज कर दोनों गुटों को नया चिह्न देकर जनता के सामने ताकत आजमाने दे। इससे दोनों गुट अपनी ताकत पर चुनाव लड़ते, न कि बालासाहेब ठाकरे के नाम और प्रतीक के आधार पर। सुनवाई बेनतीजा रही और गुरुवार को जारी रहेगी।
वकील नीरज किशन कौल के बयान
वरिष्ठ वकील नीरज किशन कौल ने बताया कि चुनाव आयोग ने 2022 में पार्टी के विधायकों वाले हिस्से में हुई टूट के आधार पर अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि राजनीतिक संगठन से जुड़ी अन्य बातों पर भी विचार किया। उन्होंने कहा कि विधायी बहुमत एक वैध पैमाना है और शिवसेना विवाद की परिस्थितियों में आयोग द्वारा अन्य उपलब्ध पैमानों पर विचार करने के बाद यही एकमात्र विकल्प बचा। कौल ने यह भी कहा कि संगठन के दो-तिहाई से ज्यादा सदस्य अध्यक्ष द्वारा नियुक्त किए जाते हैं, इसलिए संगठनात्मक ढांचा जमीनी कार्यकर्ताओं की असली राय नहीं दिखाता।
चुनाव आयोग की सुनवाई और प्रक्रिया
ECI सचिव अश्वनी कुमार मोहल ने 16 सितंबर को जारी पत्र में बताया कि यह सुनवाई ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के संबंध में आयोग को प्राप्त अभ्यावेदनों के सिलसिले में हो रही है। पत्र में 12 सितंबर, 2026 को भेजे गए पिछले पत्र का भी जिक्र है। पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों के लिए 6 अक्टूबर, 2026 को उपचुनाव होंगे। दोनों सीटों के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। गुरुवार को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जिसके बाद चुनाव आयोग उपचुनाव के मद्देनजर कोई अंतरिम व्यवस्था कर सकता है।
तृणमूल कांग्रेस विवाद
तृणमूल कांग्रेस के दो गुट ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी आमने-सामने हैं। 22 जून 2026 को ऋतब्रत बनर्जी ने पार्टी के लिए नई राष्ट्रीय कार्यकारी समिति बनाने की घोषणा की, जिसका अध्यक्ष अरूप रॉय चुना गया। बनर्जी का कहना था कि पार्टी के संविधान के अनुसार राष्ट्रीय कार्यकारी समिति का पुनर्गठन हर तीन साल में होना चाहिए। फरवरी 2022 में बनी पिछली समिति का कार्यकाल फरवरी 2025 में खत्म हो चुका था। दोनों गुटों ने तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक चुनाव चिह्न का उपयोग करते हुए अपने-अपने प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं।
अगर सभी कसौटियों में दिक्कत थी, तो चुनाव आयोग के पास एक और विकल्प भी था
न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची, सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश
चुनाव आयोग ने इस मामले की परिस्थितियों को देखते हुए विधायकों के बहुमत को सबसे व्यावहारिक आधार माना
वरिष्ठ वकील नीरज किशन कौल
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से चुनाव चिह्न फ्रीज न करने के बारे में क्या कहा?
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग के पास विकल्प था कि वह पार्टी का चुनाव चिह्न फ्रीज कर दोनों गुटों को नया चिह्न देकर जनता के सामने ताकत आजमाने दे।
- तृणमूल कांग्रेस के विवाद में राष्ट्रकार्यकारी समिति के पुनर्गठन का क्या कारण है?
- ऋतब्रत बनर्जी का कहना है कि पार्टी के संविधान के अनुसार राष्ट्रीय कार्यकारी समिति का पुनर्गठन हर तीन साल में होना चाहिए, और पिछली समिति का कार्यकाल फरवरी 2025 में खत्म हो चुका था।
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