अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में 0.25 फीसदी बढ़ोतरी की
तीन साल बाद पहली बार बढ़ी दरें, महंगाई और युद्ध के बीच आर्थिक असर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने 16 सितंबर को ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की है, जिससे फेडरल फंड्स रेट 3.75 से 4 फीसदी हो गया है। महंगाई और ईरान के साथ युद्ध के बीच यह कदम आर्थिक नीतियों और बाजारों को प्रभावित करेगा, जिसका असर भारतीय रुपए और निवेश पर भी पड़ सकता है।
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अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने 16 सितंबर को ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की है। यह जुलाई 2023 के बाद पहली वृद्धि है, जिससे फेडरल फंड्स रेट 3.75 से 4 फीसदी के दायरे में पहुंच गया है। महंगाई और ईरान के साथ युद्ध के बीच यह कदम आर्थिक नीतियों और बाजारों को प्रभावित करेगा।
फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श ने इस बढ़ोतरी को बाजार में पहले से शामिल किए जाने वाला कदम बताया है। पोनमुडी आर ने कहा, "25-bps की बढ़ोतरी अपने आप में शायद सबसे बड़ी चिंता की बात न हो, क्योंकि इस कदम का एक बड़ा हिस्सा पहले ही बाजार में शामिल किया जा चुका है।" उन्होंने बताया कि फेड के 'फॉरवर्ड गाइडेंस' पर अधिक ध्यान रहेगा।
अमेरिका में महंगाई लगभग पांच साल से फेडरल रिजर्व के 2 फीसदी लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है और ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद स्थिति और खराब हुई है। अगस्त में उपभोक्ता महंगाई दर 3.4 फीसदी रही, जो जुलाई के बराबर है। फेड को उम्मीद है कि महंगाई का मानक साल के अंत तक 3.7 प्रतिशत रहेगा, जो पहले के 3.6 प्रतिशत अनुमान से अधिक है।
फेडरल रिजर्व ने अपनी आर्थिक प्रोजेक्शन समरी में साल के अंत तक ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की संभावना जताई है। इसके साथ ही, रियल जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 2.3 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है।
इस फैसले का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ेगा। डॉलर के मजबूत होने से रुपया दबाव में आ सकता है और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में उतार-चढ़ाव आ सकता है। निवेशक रुपये, इक्विटी, सरकारी बॉन्ड यील्ड और सोने की कीमतों पर नजर रखेंगे।
अमेरिका में नवंबर 2026 के मिड-टर्म चुनावों के चलते यह फैसला राजनीतिक माहौल में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाउस की 435 सीटों और सीनेट की 35 सीटों के लिए चुनाव होंगे।
अमेरिकी कांग्रेस के बजटीय कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका को अगस्त तक करीब 38.1 अरब डॉलर (2,69,545 करोड़ रुपये) का वित्तीय नुकसान हुआ है। आने वाले एक महीने में अतिरिक्त खर्च 2 से 3 अरब डॉलर तक हो सकता है। हथियारों का उत्पादन बढ़ाने के बावजूद भंडार को सामान्य स्थिति में लाने में कम से कम पांच साल लगेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- ब्याज दरों की यह वृद्धि किस महीने के बाद पहली है?
- यह जुलाई 2023 के बाद पहली वृद्धि है, जो बाजार की उम्मीदों के अनुरूप थी।
- महंगाई दर अब तक कितनी बनी हुई है?
- महंगाई वर्तमान में फेड के 2 फीसदी लक्ष्य से ऊपर है और युद्ध के कारण और बढ़ी है।
- फेडरल रिजर्व की आर्थिक प्रोजेक्शन समरी में क्या बदलाव हुआ है?
- रियल जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 2.3 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है।
- इस ब्याज दर वृद्धि का भारतीय बाजार पर क्या असर होगा?
- डॉलर के मजबूती से रुपया दबाव में आ सकता है और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में उतार-चढ़ाव हो सकता है।
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