सरकार ने EPF वेतन सीमा बढ़ाकर ₹25,000 की, 51 लाख को फायदा
केंद्रीय कैबिनेट ने EPFO के अनिवार्य सदस्यता वेतन सीमा में 12 साल बाद बदलाव किया
केंद्रीय कैबिनेट ने EPF और EPS के लिए अनिवार्य बेसिक सैलरी सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह कर दी है, जिससे लगभग 51 लाख कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। यह फैसला 17 सितंबर से लागू होगा और अगले पांच वर्षों में सरकार को लगभग ₹56,696 करोड़ का अतिरिक्त खर्च आएगा।
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केंद्रीय कैबिनेट ने EPF और EPS के लिए अनिवार्य बेसिक सैलरी सीमा बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह कर दी है। इससे करीब 51 लाख कर्मचारियों को पेंशन और बचत का सीधा लाभ मिलेगा। यह फैसला 17 सितंबर से लागू होगा और सरकार का अनुमान है कि इससे पांच साल में लगभग ₹56,696 करोड़ का खर्च आएगा।
सीमा बढ़ाने का असर
पहले EPFO की अनिवार्य सदस्यता के लिए वेतन सीमा ₹15,000 प्रति माह थी, जो सितंबर 2014 में बढ़ाई गई थी। अब इसे 12 साल बाद बढ़ाकर ₹25,000 किया गया है। इससे उन कर्मचारियों को लाभ होगा जिनकी बेसिक सैलरी ₹15,000 से ₹25,000 के बीच है और जो अब तक अनिवार्य पीएफ दायरे से बाहर थे। उन्होंने कहा, "इससे सोशल सिक्योरिटी कवरेज बढ़ेगा और ज़्यादा कर्मचारियों को दूसरे फ़ायदे मिलेंगे।"
सरकार का वित्तीय अनुमान
सरकार का अनुमान है कि इस फैसले से सालाना अतिरिक्त खर्च करीब ₹11,339 करोड़ होगा, जबकि वर्तमान में सालाना बजटीय सहायता लगभग ₹10,250 करोड़ है। अगले पांच वर्षों में इस योजना पर कुल अनुमानित खर्च लगभग ₹56,696 करोड़ रुपये हो सकता है। EPFO में फिलहाल करीब 7.98 करोड़ सदस्य योगदान दे रहे हैं और लगभग 82 लाख पेंशनभोगियों को EPS के तहत पेंशन मिल रही है।
इस फैसले से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य EPFO कवरेज के दायरे में आ सकते हैं
अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय मंत्री
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- यह फैसला कब से लागू होगा?
- यह फैसला 17 सितंबर से लागू होगा।
- कितने कर्मचारी वर्तमान में EPFO के योगदानकर्ता हैं?
- EPFO में वर्तमान में लगभग 7.98 करोड़ सदस्य योगदान दे रहे हैं।
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