जलेसर में राधा अष्टमी पर भव्य पूजा और भजन कीर्तन
भगवान द्वारकाधीश मंदिर में वार्ष्णेय युवा मंडल ने आयोजित किया धार्मिक कार्यक्रम
जलेसर में राधा अष्टमी पर भगवान द्वारकाधीश मंदिर, इस्कॉन मंदिर और राधा-माधव मंदिर परिसर में पूजा, भजन कीर्तन और प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया। स्थानीय श्रद्धालुओं ने पारंपरिक गीत और बच्चों ने महारास लीला प्रस्तुत की। आयोजन में कई स्थानीय लोग सक्रिय रूप से शामिल हुए।
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जलेसर। जलेसर में राधा अष्टमी के पावन अवसर पर भगवान द्वारकाधीश मंदिर में वार्ष्णेय युवा मंडल के तत्वावधान में भव्य धार्मिक कार्यक्रम हुआ। मंदिर के महंत चैतन्य महाप्रभु ने राधा रानी की विशेष आरती उतारकर शुभारंभ किया। महिलाओं ने पारंपरिक मंगल गीत और सोहर गाकर भक्तिमय माहौल बनाया।
कन्हैया स्थान स्थित इस्कॉन मंदिर में विशेष आरती, भजन कीर्तन और पूजा अर्चना के साथ महाभोग का वितरण किया गया। राधा-माधव मंदिर परिसर में भी भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ और पूजन के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद बांटा गया। स्थानीय श्रद्धालु महिलाओं ने पारंपरिक सोहर गीत प्रस्तुत कर राधा रानी के प्राकट्य की खुशी मनाई। छोटे बच्चों ने भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की लीलाओं पर आधारित महारास लीला भी प्रस्तुत की।
आयोजक गौरव वक्ष उर्फ लक्की सिंह ने बताया कि सुबह की विशेष पूजा और भजन कीर्तन के बाद देर शाम महाप्रसाद का वितरण किया गया। इस आयोजन को सफल बनाने में मीरा मोहन धाम के संस्थापक इंद्रमोहन सिंह, लक्की सिंह, विमल सिंह, अंजनी श्रीवास्तव, बीजू पटनायक, गोविंदा कुमार और जितेंद्र कुमार सहित बड़ी संख्या में स्थानीय महिला व पुरुष श्रद्धालु सक्रिय रूप से जुटे रहे।
पुरोहित विष्णु पंडा ने कहा, "यह उत्सव राधा रानी की विशुद्ध भक्ति को दर्शाता है।" उन्होंने बताया कि राधा रानी हमें पूर्ण समर्पण के साथ प्रभु की सेवा करना सिखाती हैं और उनकी कृपा के बिना कोई भी श्रीकृष्ण के निकट नहीं पहुंच सकता।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- राजधानी जलेसर में राधा अष्टमी का आयोजन कैसे हुआ?
- पूजा, भजन कीर्तन, विशेष आरती, महारास लीला जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए।
- आयोजन को सफल बनाने में कौन-कौन सक्रिय था?
- मीरा मोहन धाम के संस्थापक इंद्रमोहन सिंह, लक्की सिंह, विमल सिंह, अंजनी श्रीवास्तव समेत कई स्थानीय लोग शामिल थे।
- महंत चैतन्य महाप्रभु ने क्या भूमिका निभाई?
- उन्होंने राधा रानी की विशेष आरती का शुभारंभ किया।
- पुरोहित विष्णु पंडा ने राधा रानी के महत्व के बारे में क्या कहा?
- उन्होंने कहा कि राधा रानी पूर्ण समर्पण और प्रभु की सेवा सिखाती हैं।
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