मायावती ने आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाया
9 अक्टूबर को कांशीराम पुण्यतिथि पर प्रदेश और जोन स्तर पर कार्यक्रम होंगे
बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटा दिया, यह कहते हुए कि उन्हें अभी और राजनीतिक परिपक्वता की जरूरत है। लखनऊ में हुई बैठक में आकाश को शामिल नहीं किया गया, और मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों को बसपा के निर्देशों का ईमानदारी से पालन करने और आगामी विधानसभा चुनावों के लिए तैयारियों को तेज करने का निर्देश दिया।
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बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटा दिया है। उन्होंने कहा कि आकाश को अभी राजनीतिक रूप से और अधिक परिपक्व होने की जरूरत है और इसलिए उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देना ठीक नहीं होगा।
गुरुवार को लखनऊ में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में आकाश आनंद को शामिल नहीं किया गया। यह तीसरा मौका है जब मायावती ने उन्हें पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी है। उन्होंने बताया कि आकाश अभी विरोधियों के साम, दाम, दंड, भेद जैसे हथकंडों से निपटने के लिए तैयार नहीं हैं।
मायावती ने कहा कि कांशीराम ने अपने परिवार को पार्टी में काम करने की इजाजत दी थी, लेकिन चुनाव लड़ाने या संगठन में पद देने के खिलाफ थे। वह भी उसी संकल्प पर कायम हैं। आकाश को पार्टी में काम करने की अनुमति दी गई है, लेकिन उन्हें और परिपक्व होने की जरूरत है।
बसपा का लक्ष्य शोषित लोगों को सत्ता में भागीदारी दिलाना है। मायावती ने कहा कि इस काम में उनके लिए कोई अपना या पराया नहीं है और जो भी बसपा और बहुजन समाज के हित में काम करेगा, उसका स्वागत है।
उन्होंने 2027 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब समेत पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर मंथन किया। बैठक में पहली बार आकाश के छोटे भाई ईशान भी शामिल हुए, जो बसपा का पटका पहनकर मायावती और अपने पिता आनंद कुमार के साथ मौजूद रहे। इसके अलावा दिवंगत विधायक उमाशंकर सिंह के बेटे युकेश सिंह भी बैठक में शामिल हुए।
मायावती ने पदाधिकारियों को पार्टी के निर्देशों का पूरी ईमानदारी से पालन करने की सख्त हिदायत दी और कहा कि बसपा अब पूरे देश में सभी छोटे-बड़े चुनाव अकेले लड़ेगी। उन्होंने 9 अक्टूबर को कांशीराम की पुण्यतिथि पर प्रदेश स्तर और दूसरे राज्यों में जोन स्तर पर कार्यक्रम कराने के निर्देश दिए।
मायावती ने कहा कि बसपा बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के सिद्धांतों पर चलती है। कांशीराम ने सरकारी नौकरी छोड़कर पूरा जीवन बहुजन समाज के लिए संघर्ष में लगाया और उन्हें देशभर में शोषित लोगों को जागरूक करने के लिए तैयार किया। उन्होंने उनके बताए रास्ते पर चलते हुए यूपी में बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई।
उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि आरएसएस को बाबा साहेब के संविधान पर ईमानदारी से अमल करना चाहिए। जातिवाद, असमानता, एससी, एसटी और ओबीसी के अधिकारों को लेकर आरएसएस की भूमिका पर लोगों में भरोसे की कमी है।
मायावती ने बढ़ती महंगाई और प्राकृतिक आपदाओं से हो रही परेशानियों पर चिंता जताई और कहा कि जेन-जी और जेन-अल्फा की समस्याओं को भी गंभीरता से दूर करने की जरूरत है। केंद्र और राज्य सरकारों को इन मुद्दों पर काम करना चाहिए।
पार्टी ने 2027 विधानसभा चुनाव के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। अब तक 30 से अधिक विधानसभा सीटों पर प्रभारी घोषित किए जा चुके हैं, जबकि 50 से ज्यादा नाम शॉर्टलिस्ट किए जाने की बात सामने आई है। घोषित प्रभारियों ने अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में जनसंपर्क और चुनावी गतिविधियां शुरू कर दी हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक के पद से क्यों हटाया गया?
- आकाश को राजनीतिक रूप से और अधिक परिपक्व होने की जरूरत है और इसलिए उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देना ठीक नहीं होगा, ऐसा मायावती का मानना है।
- बसपा का 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए क्या योजना है?
- बसपा ने 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को तेज कर दिया है और अब तक 30 से अधिक विधानसभा सीटों पर प्रभारी घोषित किए जा चुके हैं।
- मायावती का आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बारे में क्या कहना है?
- मायावती ने कहा कि आरएसएस को बाबा साहेब के संविधान पर ईमानदारी से अमल करना चाहिए क्योंकि जातिवाद, असमानता, एससी, एसटी और ओबीसी के अधिकारों को लेकर उसकी भूमिका पर लोगों में भरोसे की कमी है।
- मायावती ने कांशीराम की राजनीति के बारे में क्या उल्लेख किया?
- मायावती ने कहा कि कांशीराम ने परिवार के लोगों को चुनाव लड़ाने या संगठन में पद देने के खिलाफ थे और वह भी उसी सिद्धांत पर कायम हैं।
- मायावती का बसपा के उद्देश्यों के बारे में क्या कहना है?
- मायावती ने कहा कि बसपा का लक्ष्य शोषित लोगों को सत्ता में भागीदारी दिलाना है और यह पार्टी बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के सिद्धांतों पर चलती है।
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