टाटा संस के नए चेयरमैन पद के लिए तीन दिग्गजों के नाम चर्चा में
30,000 करोड़ रुपये के आईपीओ का नेतृत्व कर रहे एनएसई के आशीष चौहान भी दावेदार
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल के समाप्ति के बाद नए चेयरमैन के चयन के लिए तीन प्रमुखों टी वी नरेंद्रन, सौरभ अग्रवाल और आशीष चौहान के नाम चर्चा में हैं। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इन नामों को शीर्ष सरकारी नेतृत्व को प्रस्तुत किया है और अंतिम निर्णय जल्द ही लिया जाएगा।
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नई दिल्ली। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल के समाप्ति के बाद नए अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया तेज हो गई है। 20 फरवरी 2027 को समाप्त होने वाले कार्यकाल के लिए तीन प्रमुख कॉरपोरेट दिग्गजों के नाम चर्चा में हैं।
टाटा संस की होल्डिंग कंपनी ने नए चेयरमैन के चयन के लिए तीन प्रमुख दिग्गजों के नामों पर विचार शुरू कर दिया है। इनमें टाटा स्टील के सीईओ एवं प्रबंध निदेशक टी वी नरेंद्रन, टाटा संस के कार्यकारी निदेशक और समूह सीएफओ सौरभ अग्रवाल, तथा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के सीईओ आशीष चौहान शामिल हैं।
सूत्रों ने बताया कि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने छांटे गए उम्मीदवारों के नाम शीर्ष सरकारी नेतृत्व को बता दिए हैं और नामों पर गहन विचार-विमर्श के बाद अंतिम फैसला होने की संभावना है।
टी वी नरेंद्रन टाटा समूह के साथ तीन दशक से अधिक समय से जुड़े हैं और टाटा स्टील का नेतृत्व पिछले एक दशक से कर रहे हैं। हालांकि उनका अनुभव मुख्य रूप से टाटा स्टील तक सीमित है और होल्डिंग कंपनी स्तर पर पूंजी आवंटन में कम है।
सौरभ अग्रवाल अपने निवेश बैंकिंग अनुभव के साथ इस दौड़ में बने हुए हैं।
एनएसई के सीईओ आशीष चौहान अप्रत्याशित दावेदार साबित हो सकते हैं। उन्होंने 1990 के दशक में एनएसई की स्थापना में मदद की थी और 2022 में एनएसई प्रमुख के रूप में लौटे। चौहान ने बंबई शेयर बाजार के एमडी और सीईओ के रूप में भी कार्य किया है।
वर्तमान में चौहान 30,000 करोड़ रुपये के आईपीओ का नेतृत्व कर रहे हैं, जो भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। इसके साथ ही एनएसई का मूल्यांकन लगभग पांच लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा और यह बाजार पूंजीकरण के हिसाब से शीर्ष दस भारतीय कंपनियों में शामिल हो जाएगी।
मामले से परिचित लोगों के अनुसार चौहान एक चौंकाने वाली पसंद हो सकते हैं क्योंकि वह पूंजी बाजार और प्रौद्योगिकी-संचालित बदलावों को समझते हैं। उन्हें भारत के नियामक और नीतिगत परिवेश की भी अच्छी जानकारी है, जो समूह के अत्यधिक विनियमित क्षेत्रों में विस्तार के लिए उपयोगी होगा।
टाटा संस की चेयरमैनशिप चुनौतीपूर्ण भूमिका है, जिसमें 30 से अधिक व्यवसायों और 10 लाख से अधिक कर्मचारियों वाले समूह की निगरानी करनी होती है।
टाटा संस के बोर्ड और ट्रस्टों की अहम भूमिका रहेगी। यदि चयन प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होती है तो नोएल टाटा अंतरिम चेयरमैन के रूप में कार्य कर सकते हैं।
एन चंद्रशेखरन ने हाल ही में टाटा संस के पद पर पुनर्नियुक्ति की मांग नहीं की है। उन्होंने 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला था और वर्तमान में अपना दूसरा पांच साल का कार्यकाल पूरा कर रहे हैं।
टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस ने इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- आशीष चौहान के चयन में क्या खासियत हो सकती है?
- आशीष चौहान पूंजी बाजार, प्रौद्योगिकी बदलावों और भारत के नियामक माहौल को समझते हैं, जो समूह के अत्यधिक विनियमित क्षेत्रों के विस्तार में मदद करेगा।
- यदि चयन प्रक्रिया देर होती है तो क्या होगा?
- यदि चयन समय पर नहीं होता है तो नोएल टाटा अंतरिम चेयरमैन के रूप में कार्य कर सकते हैं।
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