टाटा ट्रस्ट्स ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को अवैध बताया
टाटा ट्रस्ट्स ने 17 सितंबर के बोर्ड फैसले की वैधता पर सवाल उठाए
टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस के 17 सितंबर के फैसले में एन. चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को अवैध बताया है, क्योंकि नामित निदेशकों के बहुमत का समर्थन आवश्यक है और चेयरमैन का कास्टिंग वोट इसे पूरा नहीं करता। ट्रस्ट्स ने इस फैसले को 'void ab initio' कहा है और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी को इस मामले में प्रतिनिधित्व के लिए नियुक्त किया है।
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नई दिल्ली। टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस के 17 सितंबर के फैसले को चुनौती देते हुए एन. चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को अवैध बताया है।
टाटा ट्रस्ट्स ने तर्क दिया कि कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के अनुसार ट्रस्ट द्वारा नामित निदेशकों के बहुमत का समर्थन अनिवार्य है। ऐसे में चेयरमैन का निर्णायक मत इस शर्त को खत्म नहीं कर सकता। ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया था, जबकि दूसरे नामित निदेशक वेणु श्रीनिवासन ने समर्थन किया। इसलिए दोनों में बहुमत का मतलब दोनों का समर्थन है, न कि केवल एक का। 17 सितंबर को एक नामित निदेशक के विरोध के कारण यह अनिवार्य शर्त पूरी नहीं हुई।
टाटा ट्रस्ट्स ने यह भी कहा कि बोर्ड के कुल मतदान का आंकड़ा जैसे 4:1 महत्वपूर्ण नहीं है। चेयरमैन का निर्णायक मत तब लागू होता है जब पूरे निदेशक मंडल के स्तर पर वोट बराबर हों, न कि नामित निदेशकों के बीच। इसलिए इस मामले में कास्टिंग वोट का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता था।
टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि 17 सितंबर का प्रस्ताव वैध रूप से पारित नहीं हुआ और इसका कोई कानूनी प्रभाव नहीं है। उन्होंने इसे 'void ab initio' यानी शुरुआत से ही शून्य बताया। ट्रस्ट्स ने वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी को पैरवी के लिए नियुक्त किया है।
सिंघवी ने कहा कि 100 साल से अधिक पुराने टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के रिश्ते को तोड़ना समझ से परे है। उन्होंने इस मामले में शेयरधारक-मालिकों के मूल अधिकारों को खत्म करने को स्वीकार्य नहीं बताया और सुप्रीम कोर्ट के टाटा-मिस्त्री फैसले का उल्लेख किया।
टाटा ट्रस्ट्स की लगभग 66% हिस्सेदारी है और उन्होंने स्पष्ट किया कि कास्टिंग वोट से दोनों नामित निदेशकों के बीच विवाद सुलझाया नहीं जा सकता। ट्रस्ट्स ने कहा कि उनके फैसलों में सर्वसम्मति की शर्त और विशेष अधिकार दशकों से लागू होते रहे हैं।
बोर्ड की बैठक में कोई गतिरोध नहीं था
टाटा ट्रस्ट्स
बोर्ड का कुल मतदान 4:1 रहा या कोई अन्य आंकड़ा, इससे फर्क नहीं पड़ता
टाटा ट्रस्ट्स
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- चेयरमैन का निर्णायक मत कब लागू होता है?
- यह मत तब लागू होता है जब पूरे निदेशक मंडल के वोट बराबर हों, न कि केवल नामित निदेशकों के बीच।
- टाटा ट्रस्ट्स के अनुसार किस बात का महत्व नहीं है?
- वे बोर्ड के कुल मतदान के औसत 4:1 की संख्या को महत्वपूर्ण नहीं मानते।
- चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर ट्रस्ट्स का क्या कहना है?
- टाटा ट्रस्ट्स ने इसे 'void ab initio' अर्थात शुरुआत से ही शून्य बताया है, जो वैध नहीं है।
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