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RBI ने टाटा संस की डी-रजिस्ट्रेशन अर्जी ठुकराई, लिस्टिंग अनिवार्य

देश की दिग्गज कंपनी टाटा संस अब शेयर बाजार में लिस्ट हो सकती है, यह अब तक का सबसे बड़ा IPO हो सकता है

भारतीय रिजर्व बैंक ने टाटा संस की कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के तौर पर अनरजिस्टर्ड रहने की अर्जी खारिज कर दी है। इससे कंपनी के लिए तीन साल के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य हो गया है। यह देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम बन सकता है।
AI सार

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने टाटा संस की कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में अनरजिस्टर्ड रहने की अर्जी खारिज कर दी है, जिससे कंपनी को तीन साल के भीतर शेयर बाजार में लिस्टिंग अनिवार्य हो गई है। टाटा संस और RBI के इस फैसले पर कंपनी के भीतर मतभेद हैं, जबकि कुछ हिस्सेदार लिस्टिंग के पक्ष में हैं।

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टाटा संस की लिस्टिंग पर फैसला
टाटा संस की लिस्टिंग पर फैसला / प्रतीकात्मक चित्र · निहारिका टाइम्स

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भारतीय रिजर्व बैंक ने टाटा संस की कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के तौर पर अनरजिस्टर्ड रहने की अर्जी खारिज कर दी है। इससे कंपनी के लिए तीन साल के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य हो गया है। यह देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम बन सकता है।

सितंबर 2022 में RBI ने टाटा संस को अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी की श्रेणी में रखा था, जिसमें तीन साल के भीतर लिस्टिंग अनिवार्य है। कंपनी ने मार्च 2024 में CIC रजिस्ट्रेशन छोड़ने की अर्जी दी थी और वित्त वर्ष 2024 में 21,813 करोड़ रुपये का कर्ज चुका दिया था ताकि डी-क्लासिफिकेशन की शर्तें पूरी हो सकें। RBI ने अब स्पष्ट किया है कि कंपनी जरूरी मानदंडों पर खरी नहीं उतरती, इसलिए अर्जी स्वीकार नहीं की जा सकती।

टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर कंपनी के भीतर मतभेद हैं। नोएल टाटा के नेतृत्व वाला टाटा ट्रस्ट्स, जिसके पास करीब 65.9 प्रतिशत हिस्सेदारी है, कंपनी को निजी और अनलिस्टेड बनाए रखने का पक्षधर है। नोएल टाटा ने चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन से आश्वासन मांगा था कि जबरन लिस्टिंग नहीं होगी, लेकिन चंद्रशेखरन ने कहा कि नियामकीय या कानूनी मामलों की गारंटी नहीं दी जा सकती।

दूसरी ओर शापूरजी पलोनजी समूह, जो 18.4 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है, लंबे समय से लिस्टिंग का समर्थन कर रहा है। अप्रैल 2026 में शापूरजी पलोनजी ने इसे जनहित का मुद्दा बताया था। दोनों परिवारों के बीच यह विवाद 2016 में साइरस मिस्त्री की टाटा संस चेयरमैन पद से विदाई के बाद से जारी है।

बाकी 13 प्रतिशत हिस्सेदारी टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा केमिकल्स और टाटा पावर जैसी कंपनियों के पास है।

RBI ने सितंबर 2022 में 16 NBFC को अपर-लेयर श्रेणी में रखा था, जो बाद में 15 रह गईं। इन कंपनियों के लिए तीन साल के भीतर लिस्टिंग जरूरी है। टाटा कैपिटल समेत बाकी कंपनियां लिस्ट हो चुकी हैं या प्रक्रिया में हैं। इस साल RBI ने नियमों का दायरा बढ़ाकर सरकारी NBFC को भी शामिल किया है और तय किया है कि 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक एसेट वाली कोई भी NBFC खुद-ब-खुद अपर-लेयर श्रेणी में आएगी।

टाटा संस की वैल्यूएशन पर आधिकारिक बयान नहीं है, लेकिन ब्रोकरेज विश्लेषणों में अनुमान है कि लिस्टिंग पर कंपनी की वैल्यूएशन 7-8 लाख करोड़ रुपये से 11 लाख करोड़ रुपये तक हो सकती है। अगर कंपनी 5 प्रतिशत हिस्सेदारी सार्वजनिक करती है, तो IPO का आकार 55,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जो देश का अब तक का सबसे बड़ा होगा।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस मुद्दे पर सीधे जवाब देने से बचते हुए कहा था कि किसी भी रजिस्टर्ड इकाई का रजिस्ट्रेशन तब तक वैध रहता है जब तक उसे रद्द न किया जाए। उन्होंने संकेत दिया कि टाइप-1 NBFC से जुड़ी नीतियों की समीक्षा जारी है।

अब सवाल यह है कि टाटा संस RBI के फैसले को स्वीकार करती है या चुनौती देती है। अगर कंपनी लिस्टिंग की दिशा में बढ़ती है, तो उसे सेबी के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दाखिल करना होगा। टाटा संस की लिस्टिंग का असर TCS, टाटा मोटर्स और टाटा स्टील जैसी कंपनियों में उसकी हिस्सेदारी के जरिए बाजार पर सीधे पड़ेगा। निवेशकों की नजर कंपनी के अगले कदम पर टिकी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

टाटा संस ने डी-क्लासिफिकेशन के लिए क्या कदम उठाए?
कंपनी ने वित्त वर्ष 2024 में 21,813 करोड़ रुपये का कर्ज चुका दिया था ताकि डी-क्लासिफिकेशन की शर्तें पूरी हो सकें।
RBI ने किस श्रेणी में टाटा संस को रखा है?
सितंबर 2022 में RBI ने टाटा संस को अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी की श्रेणी में रखा था।
लिस्टिंग को लेकर टाटा संस के अंदर क्या मतभेद हैं?
नोएल टाटा के नेतृत्व वाले ट्रस्ट कंपनी को निजी रखना चाहता है, जबकि शापूरजी पलोनजी समूह लिस्टिंग का समर्थन कर रहा है।
लिस्टिंग से टाटा संस की वैल्यूएशन कैसा अनुमान है?
ब्रोकरेज विश्लेषणों के अनुसार लिस्टिंग पर कंपनी की वैल्यूएशन 7-8 लाख करोड़ से 11 लाख करोड़ रुपये तक हो सकती है।
टाटा संस की लिस्टिंग का प्रभाव क्या होगा?
यह TCS, टाटा मोटर्स और टाटा स्टील में उसकी हिस्सेदारी के जरिए बाजार पर सीधे प्रभाव डालेगा।

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Published14 सितंबर 2026, 23:31 IST IST
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