राजस्थान स्पोर्ट्स काउंसिल ने अनुपयोगी खेल संपत्तियों को किराए पर देने का फैसला
प्रदेशभर के स्टेडियम, मैदान, हॉल समेत अन्य खेल परिसरों को व्यावसायिक उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाएगा
राजस्थान स्पोर्ट्स काउंसिल ने छह महीने से अधिक समय से उपयोग में न रहने वाली खेल संपत्तियों को किराए पर देकर आय बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके तहत मैदान, स्टेडियम, जिम, स्विमिंग पूल आदि संपत्तियों को पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया से प्रबंधन के लिए दिया जाएगा तथा विभिन्न मॉडल के तहत राजस्व हिस्सेदारी और लाइसेंस फीस के विकल्प लागू किए जाएंगे।
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जयपुर। राजस्थान राज्य स्पोर्ट्स काउंसिल ने प्रदेश के लंबे समय से अनुपयोगी पड़े खेल परिसरों को आय का स्रोत बनाने की योजना बनाई है। इसके तहत छह महीने से अधिक समय से उपयोग में न आने वाली संपत्तियों को किराए पर देकर काउंसिल राजस्व बढ़ाएगी।
स्पोर्ट्स काउंसिल की 'अनुपयोगी खेल बुनियादी ढांचे के उपयोग की नीति' के अंतर्गत सभी जिलों में ऐसी संपत्तियों की पहचान कर उनका व्यावसायिक और खेल गतिविधियों के लिए उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इसमें मैदान, स्टेडियम, जिम, स्विमिंग पूल, इंडोर हॉल, बैडमिंटन-टेनिस कोर्ट, शूटिंग व आर्चरी रेंज, कैंटीन, डॉर्मिटरी, कॉन्फ्रेंस हॉल, पार्किंग, विज्ञापन स्थल और ओपन लैंड शामिल हैं।
खाली जमीन पर अस्थायी खेल सुविधाएं, फिटनेस कैंप, खेल मेले, बच्चों के प्ले जोन, आउटडोर फिटनेस और सीमित अवधि के फूड स्टॉल की अनुमति दी जा सकेगी, जबकि स्थायी व्यावसायिक निर्माण और ऐसे उपयोग जो खेल परिसर के स्वरूप को प्रभावित करें, प्रतिबंधित रहेंगे।
काउंसिल निजी कंपनियों, फर्मों, सोसायटी, ट्रस्ट, खेल संघों, एनजीओ और अन्य पात्र संस्थाओं को पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से मैनेजमेंट ऑपरेटर के रूप में जोड़ सकेगी। बड़े स्टेडियम, स्विमिंग पूल और खेल परिसरों को तय अवधि के लिए संचालन एवं रखरखाव सहित सौंपा जाएगा, जबकि छोटे कोर्ट, कैंटीन, पार्किंग जैसी सुविधाओं के लिए लाइसेंस का प्रावधान होगा।
प्रतियोगिताओं, प्रशिक्षण शिविरों और अन्य आयोजनों के लिए सुविधाएं अल्प अवधि के लिए किराए पर भी दी जा सकेंगी। आय बढ़ाने के लिए फिक्स्ड लाइसेंस फीस, राजस्व में हिस्सेदारी, हाइब्रिड मॉडल, आयोजन शुल्क और नैमिंग राइट्स जैसे विकल्प रखे गए हैं।
प्रमुख स्टेडियम और स्विमिंग पूल में न्यूनतम 25 प्रतिशत, छोटे खेल मैदानों में 20 प्रतिशत और खुले स्थानों में 15 प्रतिशत सकल राजस्व हिस्सेदारी का प्रावधान है। कैंटीन-डॉर्मिटरी जैसी व्यावसायिक सुविधाओं में यह न्यूनतम 30 प्रतिशत तक होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- कौन-कौन सी संस्थाएं मैनेजमेंट ऑपरेटर बन सकती हैं?
- राजस्थान स्पोर्ट्स काउंसिल निजी कंपनियों, फर्मों, सोसायटी, ट्रस्ट, खेल संघों, एनजीओ और अन्य पात्र संस्थाओं को टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से मैनेजमेंट ऑपरेटर बना सकती है।
- किराए पर देने के विकल्प कौन-कौन से हैं?
- फिक्स्ड लाइसेंस फीस, राजस्व में हिस्सेदारी, हाइब्रिड मॉडल, आयोजन शुल्क और नैमिंग राइट्स जैसे विकल्प रखे गए हैं।
- स्थायी व्यावसायिक निर्माण की क्या स्थिति होगी?
- स्थायी व्यावसायिक निर्माण और ऐसे उपयोग जो खेल परिसर के स्वरूप को प्रभावित करें, प्रतिबंधित रहेंगे।
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