टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने 16 विदेशी कंपनियों के साथ समझौता किया
गुजरात और असम में फैब्रिकेशन व पैकेजिंग प्लांट से भारत बनेगा सेमीकंडक्टर हब
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत 16 अंतरराष्ट्रीय और भारतीय कंपनियों के साथ समझौते किए हैं और गुजरात तथा असम में फैब्रिकेशन और एडवांस्ड पैकेजिंग प्लांट का निर्माण कर रहा है। इन प्लांट्स के शुरू होने के बाद भारत को महंगी चिप्स विदेश से मंगवाने की आवश्यकता नहीं रहेगी और इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
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टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत 16 अंतरराष्ट्रीय और भारतीय कंपनियों के साथ समझौते किए हैं। गुजरात के धोलेरा में फैब्रिकेशन प्लांट और असम के जागीरोड में एडवांस्ड पैकेजिंग प्लांट का निर्माण तेजी से चल रहा है।
रणधीर ठाकुर ने बताया कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन का सबसे बड़ा फायदा देश के युवाओं को मिलेगा। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने अब तक 1.5 लाख से अधिक डायरेक्ट नौकरियां दी हैं, जिनमें 65 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं हैं। अधिकांश महिलाएं छोटे गांवों और गरीब परिवारों से हैं, जिन्हें वर्ल्ड-क्लास ट्रेनिंग दी गई है।
गुजरात के धोलेरा प्लांट के निर्माण में 450 से अधिक ग्लोबल पार्टनर्स काम कर रहे हैं। ये दोनों प्लांट्स शुरू होने के बाद भारत को महंगी चिप्स विदेश से मंगवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
रणधीर ठाकुर ने बताया कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने 16 नए समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें यूरोप की नेक्सपेरिया और बेसी, जापान की फुजीफिल्म, सुमितोमो, सोजित्ज, अजीनोमोटो, मलेशिया की केलिंगटन और सिंगापुर की एसेन्डस जैसी कंपनियां शामिल हैं। भारत की तरफ से एलएंडटी सेमीकंडक्टर्स, आइनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स और गति शक्ति यूनिवर्सिटी इस परियोजना में सहयोग दे रही हैं।
टाटा ने इससे पहले दुनिया की नंबर-1 चिप मशीन निर्माता कंपनी ASML के साथ भी डील की है।
PSMC के फैब्रिकेशन प्लांट में भारत के 300 युवा इंजीनियर हाई-टेक ट्रेनिंग ले रहे हैं, जो ताइवान से एडवांस्ड चिप मेकिंग तकनीक सीखकर भारत लौटेंगे और प्लांट्स में काम संभालेंगे।
रणधीर ठाकुर ने कहा कि भारत अब टेक्नोलॉजी में दुनिया के किसी भी देश से पीछे नहीं रहेगा। आज जो चिप्स भारत में डिजाइन और तैयार हो रही हैं, वे आने वाले एआई, 5G/6G इंटरनेट, स्मार्ट कार्स और सुपरकंप्यूटर्स को पावर देंगी।
साल 2014 में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर 2 लाख करोड़ रुपये का था, जो 2026 में बढ़कर 13 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में 1 डायरेक्ट नौकरी पर 10 इनडायरेक्ट नौकरियां बनती हैं, जिससे रोजगार के अवसर और बढ़ेंगे।
रणधीर ठाकुर ने कहा कि दोनों प्लांट्स पर काम तेजी से चल रहा है और सब कुछ तय समय पर पूरा हो रहा है।
टाटा का यह मास्टरप्लान युवाओं को वर्ल्ड-क्लास प्लेटफॉर्म देगा, जहां वे वैश्विक इंजीनियरों को टक्कर दे सकेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन का उद्देश्य क्या है?
- यह मिशन भारत को विदेशी चिप्स पर निर्भरता से मुक्त करना चाहता है तथा युवाओं को वैश्विक स्तर की ट्रेनिंग देना है।
- टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने किस प्रकार के कर्मचारियों को रोजगार दिया है?
- 65% कर्मचारी महिलाएं हैं, जिनमें अधिकांश छोटे गांवों और गरीब परिवारों से हैं।
- टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स किन विदेशी कंपनियों के साथ समझौता किया है?
- यूरोप की नेक्सपेरिया और बेसी, जापान की फुजीफिल्म, सुमितोमो, सोजित्ज, मलेशिया की केलिंगटन और सिंगापुर की एसेन्डस जैसी कंपनियां शामिल हैं।
- टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के प्लांट्स में कितने इंजीनियर हाई-टेक ट्रेनिंग ले रहे हैं?
- पीएसएमसी फैब्रिकेशन प्लांट में भारत के 300 युवा इंजीनियर ताइवान से तकनीक सीख रहे हैं।
- भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में वृद्धि कैसी रही है?
- 2014 में 2 लाख करोड़ रुपये था, जो 2026 में 13 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
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