राज्यपाल ने IIT ISM में पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया
खेजड़ली के 363 बलिदानियों की विरासत से प्रेरणा लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत
झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने IIT ISM धनबाद में पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि यह केवल सरकार का काम नहीं है, बल्कि समाज एवं प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने युवाओं को पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाने और सतत विकास के महत्व पर प्रकाश डाला। विश्नोई समाज ने जल संरक्षण, पक्षियों और जीव-जंतुओं की सुरक्षा जैसे अभियान चलाने की बात कही।
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उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार के बूते संभव नहीं है, इसके लिए समाज की भागीदारी जरूरी है।
कार्यशाला में सचिव जयप्रकाश नारायण सिंह, महिला प्रमुख रमा सिन्हा, प्रांत पर्यावरण संयोजक अरुण राय, जिला अध्यक्ष डॉ. विकास रमण, कार्याध्यक्ष डीएस चौबे, सचिव विकास ओझा, बीपीपी सिन्हा और अन्य मौजूद थे।
विश्नोई समाज के लोगों ने खेजड़ली के 363 बलिदानियों की विरासत को याद करते हुए पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेजड़ली का बलिदान केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए चेतावनी और प्रेरणा है।
समाज के लोगों ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण का अर्थ केवल पेड़ों को बचाना नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण प्राकृतिक व्यवस्था का हिस्सा है जिसमें मानव सहित अनेक जीव-जंतु और वनस्पतियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पेड़ केवल लकड़ी या हरियाली का साधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार हैं।
परिचर्चा में यह भी कहा गया कि पर्यावरण संरक्षण की सोच को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना सबसे बड़ी आवश्यकता है। बच्चों को पौधरोपण, प्रकृति भ्रमण और जीव-जंतुओं की देखभाल जैसी गतिविधियों से जोड़ा जाना चाहिए ताकि वे पर्यावरण संरक्षण को अपने संस्कारों का हिस्सा बनाएं।
विश्नोई समाज ने जल संरक्षण, पक्षियों के लिए पानी और जीव-जंतुओं की सुरक्षा जैसे अभियान चलाने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि प्रकृति संरक्षण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा दायित्व है।
राज्यपाल ने स्वास्थ्य क्षेत्र में उपचार के साथ रोगों की रोकथाम, स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित पोषण, योग और स्वच्छ पर्यावरण पर भी ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान केवल सरकार के प्रयासों से संभव नहीं है, इसके लिए समाज, शिक्षण संस्थान, वैज्ञानिक, उद्योग और प्रत्येक नागरिक की भागीदारी जरूरी है।
कार्यशाला का आयोजन IIT ISM धनबाद के गोल्डन जुबली हॉल में आरोग्य भारती और संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इस अवसर पर विद्यालय प्रबंधन ने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया। विद्यालय के चेयरमैन स्वामी शरदपुरी, प्रधानाचार्य पुनीत श्रीवास्तव सहित शिक्षक भी मौजूद थे।
जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण और घटती जैव-विविधता वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियां हैं
संतोष कुमार गंगवार, झारखंड के राज्यपाल
विकास की अंधी दौड़ के बजाय हमें ऐसा सतत माडल अपनाना होगा, जो वर्तमान की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ हमारी भावी पीढ़ियों के भविष्य को भी सुरक्षित रखे
संतोष कुमार गंगवार, झारखंड के राज्यपाल
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- खेजड़ली बलिदान की क्या सामाजिक भूमिका है?
- यह बलिदान केवल अतीत की स्मृति नहीं बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए चेतावनी एवं प्रेरणा देता है।
- बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के लिए कैसे प्रेरित किया जा सकता है?
- बच्चों को पौधरोपण, प्रकृति भ्रमण और जीव-जंतुओं की देखभाल जैसी गतिविधियों से जोड़ा जाना चाहिए।
- विश्नोई समाज के संरक्षण अभियान किन पहलुओं पर केंद्रित हैं?
- वे जल संरक्षण, पक्षियों के लिए पानी और जीव-जंतुओं की सुरक्षा जैसे अभियानों पर फोकस करते हैं।
- पर्यावरण संरक्षण का परिभाषा समाज ने कैसे दी?
- पर्यावरण संरक्षण का मतलब केवल पेड़ों को बचाना नहीं, बल्कि मानव समेत सारे जीव-जंतु और वनस्पतियाँ शामिल हैं।
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