हाईकोर्ट ने स्कूल वाहनों की सुरक्षा के लिए कड़े निर्देश दिए
लखनऊ बेंच ने सभी स्कूलों में परिवहन सुरक्षा समितियां बनाने का आदेश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने स्कूल वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्कूल परिवहन सुरक्षा समितियों के गठन और नियमों के कड़ाई से पालन के निर्देश दिए हैं। जिला अधिकारी इन समितियों की निगरानी करेंगे और एक महीने के भीतर अनुपालन की रिपोर्ट देंगे।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने प्रदेश के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। न्यायालय ने स्कूल वाहनों के परमिट और सुरक्षा नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने के साथ सभी स्कूलों में परिवहन सुरक्षा समितियां बनाने का आदेश दिया है।
न्यायालय ने मुख्य सचिव को जिला स्कूल वाहन सुरक्षा समिति की नियमित बैठकें कराने और स्कूल परिवहन सुरक्षा समितियों के प्रदर्शन की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही जिलाधिकारियों को इन समितियों का विधिवत गठन सुनिश्चित करने का काम सौंपा गया है। आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के एक सप्ताह के भीतर ये निर्देश जारी करने होंगे और जिला मजिस्ट्रेटों को एक महीने में अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश गोमती रिवर बैंक रेजिडेंट्स की जनहित याचिका पर दिया है, जिसमें स्कूलों की सुरक्षा और स्कूली बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया गया था।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि स्कूली वाहनों के लिए नियम 222A के अनुसार परमिट अनिवार्य है, जिसमें शिक्षा संस्थान और निजी बसों के लिए अलग-अलग प्रावधान हैं। स्कूल वैन के परमिट के लिए अभिभावक या अभिभावकों के समूह के साथ समझौता होना जरूरी है, लेकिन ज्यादातर स्कूल वैन के पास नियमानुसार परमिट नहीं हैं।
नियम 222E के तहत जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली समिति को निगरानी का कार्य सौंपा गया है, जबकि नियम 222G के तहत हर स्कूल में स्कूल परिवहन सुरक्षा समिति का गठन अनिवार्य है। हालांकि, न्यायालय को बताया गया कि फिलहाल किसी भी स्कूल में यह समिति काम नहीं कर रही है। जिला स्तरीय समिति को इन समितियों से समय-समय पर रिपोर्ट भी लेनी होगी, जिनमें महिला परिचारिका और बालिकाओं की सुरक्षा से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं।
न्यायालय ने जिलाधिकारियों को आदेश के पालन की जानकारी एक महीने के भीतर देने को कहा है। इसके बाद सरकारी वकील सभी जिलों से मिली रिपोर्ट के आधार पर अनुपालन शपथपत्र दाखिल करेंगे।
कोर्ट ने कहा है, "स्कूली वाहनों के परमिट और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित किया जाए।" न्यायालय ने यह भी कहा कि "समितियों के गठन से स्कूलों और संबंधित अधिकारियों को स्कूली वाहनों से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी होगी।"
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- स्कूल परिवहन सुरक्षा समितियों का उद्देश्य क्या है?
- समितियों का उद्देश्य स्कूल वाहनों की सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करना और बच्चों की सुरक्षा बढ़ाना है।
- परमिट न होने पर स्कूल वैन कौन-सी समस्या होती है?
- परमिट न होने से स्कूल वाहनों की कानूनी वैधता समाप्त हो जाती है और वाहन संचालक और स्कूल दोनों कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।
- जिला मजिस्ट्रेट की भूमिका क्या है?
- जिला मजिस्ट्रेट अध्यक्षता वाली समिति की निगरानी करनी होती है और स्कूल परिवहन सुरक्षा समितियों से रिपोर्ट लेनी होती है।
- जनहित याचिका किसने दायर की थी?
- यह याचिका गोमती रिवर बैंक रेजिडेंट्स ने दायर की थी।
- सुनवाई के दौरान अदालत को स्कूलों की सुरक्षा में कौन-सी कमी बताई गई?
- अदालत को बताया गया कि फिलहाल किसी भी स्कूल में परिवहन सुरक्षा समिति काफ़ी सक्रिय नहीं है।
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