किशाऊ बांध परियोजना की लागत बढ़ी, किसानों को सिंचाई में लाभ
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने परियोजना का श्रेय अपनी सरकार को दिया
किशाऊ बांध परियोजना की लागत बढ़कर 3,000 से 5,000 करोड़ रुपये हो गई है, जिससे बिजनौर के किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। इस परियोजना में छह राज्यों ने सहमति दी है और यह बिजली उत्पादन के साथ यमुना नदी से पानी आपूर्ति करेगी। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं।
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झुंझुनूं। किशाऊ बांध परियोजना की लागत पिछले पांच वर्षों में 800 करोड़ रुपये से बढ़कर 3,000 से 5,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इस परियोजना से बिजनौर जिले के किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलने की उम्मीद है।
केंद्र सरकार की पहल से किशाऊ बांध परियोजना में छह राज्यों ने सहमति जताई है। इस परियोजना के तहत उत्तराखंड के टनकपुर से बिजनौर, हरिद्वार, मुजफ्फरनगर और शामली तक नहर बनाई जाएगी। टोंस नदी पर बांध बनाकर बिजली उत्पादन के साथ किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इससे जिले में भूमि अधिग्रहण भी हो सकता है।
बिजनौर जिले में अभी फसलों की सिंचाई पूर्वी मध्य गंगा नहर, पीली बांध जलाशय और रामगंगा बांध कालागढ़ से होती है। किसान नलकूपों और नहरों के पानी का उपयोग करते हैं, लेकिन गंगा पर बने बैराज से निकलने वाली मध्य गंगा नहरों का पानी जिले के किसानों को नहीं मिलता। केंद्र सरकार यमुना नदी से क्षेत्र को जोड़ने की योजना बना रही है।
किशाऊ बांध परियोजना से नूरपुर, जलीलपुर जैसे क्षेत्रों में भूजल स्तर बढ़ेगा। यहां के किसानों के लिए यह पानी महत्वपूर्ण होगा क्योंकि जलीलपुर क्षेत्र में बरसात में बाढ़ के हालात होते हैं।
राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनूं जिलों में यमुना का पानी लाने के लिए 17 फरवरी 2024 को समझौता हुआ था। इस परियोजना के तहत किशाऊ बांध से राजस्थान को आवंटित 124 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी को भूमिगत पाइपलाइन के जरिए हरियाणा की हांसी-बुटाना प्रणाली से चूरू तक पहुंचाया जाएगा। यह पानी इन जिलों की पेयजल और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करेगा।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री की अध्यक्षता में नई दिल्ली में किशाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना के लिए एमओयू हुआ है। इसमें राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों ने हस्ताक्षर किए। परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 15 हजार करोड़ रुपये है और यह 660 मेगावाट जल विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करेगी।
संशोधित व्यवस्था के तहत हिमाचल प्रदेश को आवंटित जल हिस्से का एक भाग राजस्थान और दिल्ली को दिया जाएगा। केंद्र सरकार जल घटक की लागत का 90 प्रतिशत सहायता के रूप में देगी, जबकि भागीदार राज्य 10 प्रतिशत का योगदान देंगे। परियोजना का संचालन किशाऊ कॉर्पोरेशन लिमिटेड करेगा और इसकी निगरानी ऊपरी यमुना बेसिन के लिए स्थापित ढांचे के तहत होगी।
जब तक वह मुख्यमंत्री हैं, जनता के हक की लड़ाई जारी रखेंगे
सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री
भाजपा नेताओं को उत्तराखंड से उसकी पीड़ा के बारे में पूछना चाहिए
मुख्यमंत्री
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- किशाऊ बांध परियोजना के तहत कौन-कौन से जिले और राज्य शामिल हैं?
- इस परियोजना में उत्तराखंड के टनकपुर से बिजनौर, हरिद्वार, मुजफ्फरनगर, शामली, राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनूं सहित छह राज्यों के क्षेत्र शामिल हैं।
- किशाऊ बांध परियोजना किस नदी पर बन रही है और इसका उद्देश्य क्या है?
- यह बांध टोंस नदी पर बनाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य बिजली उत्पादन के साथ किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना है।
- केंद्र सरकार इस परियोजना में किन सहायता स्वरूप योगदान देगी?
- केंद्र सरकार जल घटक की लागत का 90 प्रतिशत सहायता करेगी, जबकि भागीदार राज्य 10 प्रतिशत का योगदान देंगे।
- किशाऊ बांध परियोजना से भूजल स्तर पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
- परियोजना से नूरपुर, जलीलपुर जैसे क्षेत्रों में भूजल स्तर बढ़ेगा, जो बारिश के दौरान बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
- परियोजना के संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी किसकी होगी?
- परियोजना का संचालन किशाऊ कॉर्पोरेशन लिमिटेड करेगा और इसकी निगरानी ऊपरी यमुना बेसिन के लिए स्थापित ढांचे के तहत होगी।
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