सुरेंद्र कोली की मौत पर विवाद, पीड़ितों ने साजिश का लगाया आरोप
2006 के निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली की मौत के बाद सवाल फिर उठे
निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली की मौत के बाद मामले में विवाद फिर से उभरा है, जहां पीड़ितों ने इसे साजिश बता कर जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। कोली की मौत के कारणों का पता नहीं चल पाया है, जबकि निठारी कांड में अब भी कई सवाल अनसुलझे हैं।
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विजय यादव। निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली की मौत के बाद यह मामला फिर से चर्चा में आ गया है। छह अखबारों की रिपोर्टों के अनुसार, कोली की मौत को लेकर विवाद जारी है और पीड़ितों ने इसे साजिश बताया है। 29 दिसंबर 2006 को यह कांड पूरे देश में सुर्खियों में था।
सुरेंद्र कोली, जो उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के मंगारू खाल गांव के निवासी थे, दो दशकों तक निठारी कांड के आरोपी रहे। सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के बाद वह ग्रेटर नोएडा की लुकसर जेल से रिहा हुए। जेल से बाहर आने के बाद वह हरिद्वार में 6,000 रुपये महीने किराए पर चाय की दुकान चलाने लगे। इससे पहले उन्होंने सुरक्षा गार्ड के रूप में भी काम किया था, लेकिन आधार कार्ड मांगे जाने पर नौकरी छोड़ दी।
पीड़ितों का कहना है कि करीब 20 साल बीतने के बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिला। झब्बूलाल और सुनीता, जो निठारी कांड के पीड़ित हैं, कहते हैं कि जांच एजेंसियां सही से काम करतीं तो आरोपियों को फांसी की सजा मिलती। सुनीता ने बताया कि बेटी ज्योति की हत्या की आशंका है।
29 दिसंबर 2006 को निठारी गांव में मोनिंदर सिंह पंधेर के घर के पीछे नाले से आठ बच्चों के कंकाल मिले थे। इस मामले में पंधेर और सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया गया था। जांच सीबीआइ को सौंपी गई, लेकिन दोनों को सुप्रीम कोर्ट से बरी कर दिया गया।
कोली की मौत के बाद स्थानीय लोग मोनिंदर सिंह पंधेर की कोठी के सामने इकट्ठा हो गए। इस घटना ने देशभर में निठारी कांड को फिर से सुर्खियों में ला दिया है और 19 बच्चों की मौत का रहस्य अब भी अनसुलझा है।
रावत ने बताया कि कोली ने मौत से दो-तीन दिन पहले फोन पर किसी राजनीतिक संगठन से जुड़े स्थानीय व्यक्ति द्वारा उत्पीड़न और अधिक पैसे की मांग की शिकायत की थी। उन्होंने चाय की दुकान खोलने के लिए 25,000 रुपये उधार लिए थे। पुलिस ने मौके से या कोली के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं पाया।
कोली के छोटे भाई ने कहा कि वह नियमित संपर्क में था, लेकिन कोली ने कभी किसी परेशानी का जिक्र नहीं किया। जानने वालों के अनुसार, कोली ने जेल से निकलने के बाद अकेलापन महसूस किया था।
यह मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है, लेकिन पीड़ितों ने इसे साजिश बताया है। जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि कई सवाल अभी भी अनसुलझे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सुरेंद्र कोली ने जेल से रिहा होने के बाद क्या किया था?
- वह हरिद्वार में 6,000 रुपये महीने किराए पर चाय की दुकान चलाने लगे थे।
- सुरेंद्र कोली की मौत से पहले उन्होंने क्या शिकायत की थी?
- उन्होंने स्थानीय राजनीतिक संगठन से जुड़े किसी व्यक्ति द्वारा उत्पीड़न और अधिक पैसे की मांग की शिकायत की थी।
- पीड़ितों का निठारी कांड में न्याय मिलने को लेकर क्या कहना है?
- पीड़ितों का कहना है कि करीब 20 साल बीतने के बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिला है और जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाए जाते हैं।
- कोली की मौत के बाद स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया क्या थी?
- कोली की मौत के बाद स्थानीय लोग मोनिंदर सिंह पंधेर की कोठी के सामने इकट्ठा हो गए थे।
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